ASANSOL-BURNPUR

बंद हुई फैक्ट्री पर अब भी होती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा

बंगाल मिरर,‌आसनसोल : पश्चिम बंगाल आसनसोल का बर्णपुर इलाका जो एक समय रेल वैगन बनाने में बर्न स्टैंडर्ड कारखाने के नाम से जानी और पहचानी जाती थी, यह कारखाना बर्णपुर मे 1918 मे स्थापित हुई थी, दो कंपनियों बर्न कंपनी और भारतीय स्टैंडर्ड वैगन का विलय कर एक कारखाना बनाया गया, जिसके बाद 1975 में इस कारखाने को राष्ट्रीयकरण किया गया।

हावड़ा और बर्नपुर में अपनी दो इंजीनियरिग इकाइयों के साथ कंपनी सितंबर 2010 में रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गई। सौ वर्ष के उतार चढ़ाव को देखने के बाद चार अप्रैल 2018 को कैबिनेट ने बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड के नुकसान को देख इसे बंद करने की मंजूरी दी थी।जिसके बाद यह कारखाना दस सितंबर 2018 को बंद हो गया, कारखाना बंद होने के बाद स्थाई श्रमिकों ने कारखाना दोबारा खोलवाने की आस मे श्रमिक नेताओं के साथ मिलकर जोड़दार आंदोलन किया पर फायदा नही हुआ, जिसके बाद उन्होंने भी आर एस दे दिया बाकि कारखाने से जुड़े करीब 500 से ज्यादा ठेकेदारी पर कार्यरत श्रमिकों को काम से बैठा दिया गया, तब से कारखाने की हालात बत से बत्तर हो चुकी है,

शनिवार को सृष्टि के आदि शिल्पी भगवान विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखाने मे सन्नाटा देखा गया, इस सन्नाटे के बिच एक टूटी फूटी जर्ज़र मकान मे भगवान विश्वकर्मा का फोटो लगाकर पानी सफलाई करने वाला एक कर्मचारी भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हुए दिखाई दिया, पूछने पर उसने बताया की वह 1955 से इस कारखाने मे कार्य कर रहा है, वह उस समय प्राइवेट पर नौकरी जॉइन की थी, आज भी वह प्राइवेट पर ही कारखाने मे कार्यरत है, उसने कहा कारखाना 2018 मे बंद हो गया,

कारखाने के सरकारी व गैर सरकारी सभी कर्मचारी कारखाने से हटा दिए गए, पर वह अब भी कारखाने मे कार्यरत है, क्यों की कारखाने के आसपास के इलाकों मे कारखाने का ही पानी सफलाई होता है, इस लिये वह अब भी कार्य कर रहा है, भले ही कारखाने के तरफ से उसे उसके कार्य के लिये कुछ नही मिलता पर स्थानीय लोग चंदा कर उसे पैसे देते हैं, उसने कहा जब से कारखाना बंद हुआ है तब से वह हर विश्वकर्मा पूजा के दिन आता है, और वह भगवान विश्वकर्मा का फोटो लगाकर उनकी पूजा करता है, और वह वापस अपने कार्य मे लग जाता है,

उसने कहा की एक समय था, जब इस फैक्ट्री मे भगवान विश्वकर्मा की पूजा होती थी, तब इस फैक्ट्री मे काफी चहल -पहल होती थी, दूर -दराज से लोग इस फैक्ट्री मे आयोजित भगवान विश्वकर्मा की पूजा देखने आते थे, यहाँ काफी भीड़ होती थी, लोगों का भीड़ संभालना मुश्किल हो जाता था, कारखाने के आस -पास के इलाके मे मेला जैसा माहौल होता था, आज यह इलाका वीरान हो गया है, यहाँ उसके सिवा कोई नही आता, उसने कहा कारखाने की सुरक्षा के लिये कारखाने मे रेलवे सुरक्षा बल के जवानो की तैनाती की गई है, पर इस कारखाने मे ना तो बिजली की वेवस्था है, और ना ही पिने की पानी की कारखाने मे इतने घने जंगल हो गए हैं, की रात तो रात यहाँ दिन मे भी अंधेरा छाया रहता है,

कारखाने मे नियमित रूप से साफ -सफाई नही होने के कारण विभिन्न प्रकार के शांप निकलते हैं, जिस कारण हर समय हर वक्त उनकी जान पर बनी रहती है, फैक्ट्री की दुर्दशा को लेकर कई बार कोलकाता स्थित हेड ब्रांच मे पत्र लिखे गए पर ना तो पत्र का कोई जवाब आया, और ना ही पत्र को लेकर कोई अधिकारी या फिर कोई कर्मचारी ही फैक्ट्री की कोई सुध लेने आया, जिस कारण फैक्ट्री की दिन प्रतिदिन हालात बिगड़ती जा रही है,

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