43 वां उर्स मुबारक के मौके पर दादा पीर के चाहने वालों कि उमड़ी भारी भीड़
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी है हम वतन है हिंदोस्ता हमारा
बंगाल मिरर, आसनसोल:- जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत की आबादी लगभग 140 करोड़ है. 140 की जनसंख्या में हर धर्म और जाति के लोग भारत में रहा करते हैं. 140 करोड़ कि जनसंख्या के लोग आपस में भाईचारगी के साथ रहा करते हैं. इसका जीता जगता उदाहरण हम लोगों ने कोरोना काल के समय अपनी आँखों से देखा है. अथवा मिशन सिंदूर जंग के दौरान भी एक जुट होकर दुश्मन का मुकाबला किया है. मगर कुछ ऐसे आसामाजिक लोगों के कारण देश की फिजा को खराब करने का षड्यंत्र चलाया जा रहा है. लेकिन आज भी सच्चे राह पर चलने वालों की कमी नहीं है जो देश से प्रेम करते हैं. वह कभी धर्म व जाति के नाम पर नहीं बटते।इसका जिता जगता मिशाल पश्चिम बंगाल के आसनसोल मैं देखा जा सकता है. जी हां मैं आसनसोल श्रीपुर दादा पीर की दरगाह की और आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। दादा पीर की दरगाह।














दादा पीर का 43वं सालाना उर्स मुबारक बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 21 नवंबर से 24 नवंबर तक चलता है हैउर्स. उर्फ मुबारक के मौके पर दादा पीर के चाहने वालों की उमड़ती है भारी भीड़। 21 नोवम्बर को दादा पीर कि कुरानखानी, 22 नवम्बर को दादा पीर का संदल, और 23 नवम्बर को दादा पीर कि चादर पोशी कि जाती है। 3 दिवसीय उर्स मोबारक के मौके पर दादा पीर के दोनो शाहबजादों ने और मज़ार प्रबंधन कमेटी के द्वारा दादा पीर के जायरीनों के लिए लंगर के साथ साथ रहने के भी प्रबंध करवाया जाता है। ताकि दूर दूर से आए जायरीनों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। मुबारक में भारत के विभिन्न जिलों से दादा पीर के चाहने वाले शामिल होते हैं. कौन किस धर्म का मानने वाला है। पता ही नहीं चलता. उर्स मुबारक में लंगर का भी इंतजाम किया जाता है. श्रीपुर तीन नंबर के रहने वाले बबलू साहब ने दादा पीर से बेपनाह मोहब्बत का इजहार किया।
उन्होंने बताया कि मैं हर साल दादा पीर के जारिनों के लिए लंगर का इंतजाम करता हूं. यह मेरे पीर का करम है. मुझे इस कार्य करने का अवसर दिया है. उन्होंने बताया कि एक साथ, एक जगह बैठ कर लंगर को खाया जाता है. इस दरगाह की खासियत यह है कि जो अपनी मुरादे लेकर पीर बाबा की दरगाह आते हैं वह पीर बाबा की दरगाह जाकर अपनी दुआएं करते हैं. पीर बाबा के नजरे करम से जिनके साथ जो मुसीबत होती है दादा पीर उनकी तकलीफ परेशानियों को दूर कर देते हैं।सज्जादानशी-हज़रत मौलाना औनुर रहमान नकशबंदी ने बताया कि दरगाह की खासियत कि जो जायरीन आते है दरगाह शरीफ पर कोई पैसा नहीं देना पड़ता है. ना कोई मौलवी या मौलाना को दिखाना पड़ता है। सज्जादानशी-हज़रत मौलाना सैयद शाह औनुर रहमान नकशबंदी, और हज़रत मौलाना सैयद शाह इरफानुर रहमान ने संदल के मौके पर अल्लाह पाक से दुआ कि मेरे वतन के लोगों को हर दुख व परेशानी से दूर रखना। इस दर पर आने वाले और जो नहीं आ पाए हैं हर लोगों कि हर तकलीफ व परेशानियों को दूर कर दे।


