PURULIA-BANKURA

नागरिक सेवाएं देने में फेल, पुरुलिया नगर पालिका बोर्ड भंग, कोई काउंसिलर नहीं रहा

एसडीओ को नियुक्त किया गया प्रशासक

बंगाल मिरर, पुरुलिया : ( Purulia News ) पुरुलिया नगर पालिका के चेयरमैन नवेंदु महाली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही पुरुलिया नगर पालिका का बोर्ड भंग कर दिया गया है। अब नगर पालिका में कोई भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि या काउंसलर नहीं है। सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए राज्य सरकार ने पुरुलिया (सदर) के महकुमा शासक उत्पलकुमार घोष को नगर पालिका का प्रशासक नियुक्त किया है।

मंगलवार शाम राज्य के नगर विकास एवं नगर मामलों के विभाग से नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी सहित जिलाधिकारी के पास आदेश पहुंचते ही एसडीओ उत्पलकुमार घोष ने अपने कार्यालय में नगर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में साफ किया गया कि शहर की **कचरा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट**—इन तीन मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इन्हीं कार्यों से प्रशासक के रूप में एसडीओ की “नगर पारी” शुरू होगी, ऐसा महकुमा प्रशासन के सूत्रों ने बताया।

हालांकि, इस विषय में न तो जिलाधिकारी, न ही महकुमा शासक और न ही नगर पालिका के अधिकारी कोई औपचारिक बयान देना चाहते हैं। बोर्ड भंग होने से सत्तारूढ़ दल के वे काउंसलर निराश हैं, जो लगातार चेयरमैन नवेंदु महाली का विरोध करते आ रहे थे, क्योंकि अब कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि शेष नहीं रहा।

इस बीच भाजपा के इस फैसले को लेकर हाईकोर्ट जाने की खबर है। हालांकि नगर प्रशासन का दावा है कि हाईकोर्ट में भी यह मामला टिकेगा नहीं। प्रशासन का कहना है कि बोर्ड ऑफ काउंसलर्स की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि नगर पालिका नागरिक सेवाएं देने में असमर्थ रही है। उस बैठक में काउंसलरों ने व्यावहारिक रूप से अपनी विफलता स्वीकार की थी। इसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट में भी नगर पालिका की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है, ऐसा नगर विकास विभाग के सूत्रों ने बताया।

रात में पद छोड़ने के बाद पूर्व चेयरमैन नवेंदु महाली ने कहा,

“चेयरमैन का पद प्रशासनिक है, लेकिन यह पूरी तरह पार्टी का मामला है। पार्टी ने मुझे चेयरमैन बनाया था। पार्टी जो कहेगी, मैं वही मानूंगा। मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं।”

गौरतलब है कि 19 नवंबर को राज्य के नगर विकास एवं नगर मामलों के विभाग ने पुरुलिया नगर पालिका को नगर उदासीनता के आरोप में शो-कॉज नोटिस जारी किया था। आरोप थे—

1. सफाई व्यवस्था का अभाव और जर्जर नाली व्यवस्था,

2. अनियमित जल आपूर्ति,

3. जगह-जगह कचरा जमा रहना।

इस शो-कॉज के आधार पर चेयरमैन ने बैठक बुलाने की कोशिश की, लेकिन विशेष कारणों से वह बैठक स्थगित हो गई। इसके बाद 26 नवंबर को बिना बैठक बुलाए ही शो-कॉज का जवाब भेज दिया गया। लेकिन 27 नवंबर को विभाग ने ई-मेल कर स्पष्ट निर्देश दिया कि बोर्ड ऑफ काउंसलर्स की बैठक बुलानी होगी और यह भी प्रमाण देना होगा कि सभी काउंसलरों को शो-कॉज नोटिस मिला है।

आखिरकार 1 दिसंबर को आनन-फानन में बोर्ड ऑफ काउंसलर्स की बैठक बुलाई गई। हालांकि शुरुआत में सत्तारूढ़ दल के काउंसलरों ने अनुपस्थित रहने की बात कही, लेकिन राज्य तृणमूल कांग्रेस के निर्देश पर व्हिप जारी कर सभी काउंसलरों को बैठक में शामिल कराया गया। बैठक के बाद 1 दिसंबर की रात चेयरमैन ने शो-कॉज का उत्तर भेजा। इससे पहले 26 नवंबर को जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच के लिए स्वयं पुरुलिया (सदर) के महकुमा शासक उत्पलकुमार घोष नगर पालिका पहुंचे थे।

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