DRM Asansol बनी बलि का बकरा ? जमीन आवंटन, करोड़ों के नगदी खर्च को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल, डॉक्यूमेंट वायरल
आसनसोल की DRM विनीता श्रीवास्तव के स्थानांतरण पर विवाद पर CAT कोलकाता में सुनवाई कल
बंगाल मिरर, आसनसोल : पीएम मोदी का नारा था कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा लेकिन आसनसोल रेल मंडल में इसके उल्टे ही खेल चल रहा है। आसनसोल मंडल की मात्र छह महीने की मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रहीं श्रीमती विनीता श्रीवास्तव को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। जमुई (तेलवा बाजार) में हुए रेल हादसे के बाद उन्हें “बलि का बकरा” बनाए जाने की साजिश का आरोप लग रहा है, जिसमें पूर्व रेलवे के बड़े अधिकारियों की भूमिका होने की बात कही जा रही है।














हादसे के बाद DRM विनीता श्रीवास्तव द्वारा दिखाई गई साइट मैनेजमेंट की तत्परता और कुशलता को रेल अधिकारियों के एक वर्ग ने सराहनीय बताया है। बावजूद इसके, दुर्घटना के बाद यातायात बहाली में कथित देरी का हवाला देकर उनका अचानक स्थानांतरण कर दिया गया, जिस पर अब कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
CAT में कानूनी जंग



DRM विनीता श्रीवास्तव ने अपने स्थानांतरण आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), कोलकाता में चुनौती दी है। उन्होंने नए DRM के रूप में नियुक्त सुधीर शर्मा को अब तक पदभार नहीं सौंपा है। उनके वकील का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के उन्हें वेस्ट सेंट्रल रेलवे भेजा गया और ट्रांसफर ऑर्डर की प्रति भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। स्थानांतरण की जानकारी उन्हें अनौपचारिक रूप से सुधीर कुमार शर्मा के माध्यम से दी गई।CAT कोलकाता में हुई सुनवाई के दौरान रेलवे और DRM—दोनों पक्षों की उपस्थिति दर्ज हुई। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने मामले को स्वीकार करते हुए रेलवे से पूछा कि बिना स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के उसी दिन ट्रांसफर और चार्ज सौंपने का क्या औचित्य था। रेलवे के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई की तारीख 08 जनवरी 2026 तय करते हुए तब तक यथास्थिति बनाए रखने और आवेदक (DRM) के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
हादसे के बाद बहाली और आरोप

DRMआसनसोल का स्थानांतरण तेलवा बाजार दुर्घटना के बाद यातायात बहाली में कथित देरी से जोड़ा जा रहा है। यह देरी 30 दिसंबर 2025 को रात 8 बजे प्रस्तुत 2.22 करोड़ रुपये के कैश इम्प्रेस्ट के हस्तलिखित प्रस्ताव को DRM द्वारा अनुमोदन न दिए जाने से जोड़कर बताई गई।हालांकि, MSOP Part-C, Para 10(E) के अनुसार दुर्घटना की स्थिति में बहाली से संबंधित व्यय की पूर्ण शक्तियाँ JAG/SG अधिकारियों को निहित हैं। ऐसे मामलों में DRM की स्वीकृति या वित्तीय सहमति आवश्यक नहीं होती, तथा रोड क्रेन और अन्य बहाली उपकरणों की हायरिंग के लिए स्वतंत्र अधिकार पहले से मौजूद हैं।तथ्य जो DRM के पक्ष मेंDRM विनीता श्रीवास्तव 28 दिसंबर 2025 को रात 00:14 बजे ART के साथ दुर्घटना स्थल पर पहुंचीं और 31 दिसंबर सुबह लगभग 04:00 बजे तक (करीब 75 घंटे) लगातार मौके पर मौजूद रहकर बहाली कार्य की निगरानी की।डाउन मेन लाइन (ट्रैक और OHE) को 30 दिसंबर 2025 को 00:10 बजे फिट घोषित कर दिया गया था, फिर भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 19 घंटे से अधिक समय तक सिंगल लाइन वर्किंग की अनुमति नहीं दी गई।2.22 करोड़ रुपये के कैश इम्प्रेस्ट का प्रस्ताव 30 दिसंबर को रात 8 बजे प्रस्तुत हुआ, तब तक बहाली कार्य लगभग पूरा हो चुका था।वास्तविक देरी का कारण रोड क्रेन और काउंटरवेट की देर से उपलब्धता रहा, जिसकी व्यवस्था पूर्व रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन द्वारा की जा रही थी।इन तथ्यों के आधार पर DRM को देरी के लिए जिम्मेदार ठहराना MSOP प्रावधानों के अनुरूप नहीं बताया जा रहा है।
RLDA को जमीन ट्रांसफर का मामला
मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। अक्टूबर 2025 में DRM विनीता श्रीवास्तव ने आसनसोल मंडल की एक महत्वपूर्ण और कीमती रेलवे जमीन को RLDA (रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) को सौंपने के संबंध में पूर्व रेलवे मुख्यालय, कोलकाता को पत्र लिखकर जांच कराने का अनुरोध किया था। रेलवे से जुड़े कुछ अधिकारियों का दावा है कि इस जमीन ट्रांसफर को लेकर भू-माफियाओं के दबाव में कार्रवाई हुई, जिसे DRM ने सवालों के घेरे में लाया था।
प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का आरोप
उनका स्थानांतरण बिना अवसर और सुनवाई दिए, तथ्यों की अपूर्ण समझ के आधार पर किया गया है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।CAT में हुई सुनवाई से जुड़े दस्तावेजों की छह पन्नों की प्रतियां भी सामने आई हैं, जिन्हें मामले के समर्थन में प्रस्तुत किया गया है। अब 8 जनवरी 2026 की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि रेलवे प्रशासन अपने फैसले को कैसे न्यायोचित ठहराता है।
इस मामले में रेलवे की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दस्तावेजों की पुष्टि बंगाल मिरर नहीं करता है।

