BARABANI-SALANPUR-CHITTARANJAN

बाराबनी के कास्कूली में किसके संरक्षण में चल‌ अवैध पत्थर खदान ?

बगैर इसी सर्टिफिकेट, सिटीई, सिटीओ, डिजिएमएस और जिला प्रशासन से चालान धड़ल्ले से संचालन

बंगाल मिरर, आसनसोल :, पश्चिम बंगाल आसनसोल बराबनी विधानसभा के गोरंडी स्थित कास्कूली मे चल रहे अवैध पत्थर खदान और क्रेसर का धंदा थमने का नाम नही ले रहा, कुछ दिनों पहले ही एक आदिवासी समाज ने भारत जकात माझी परगना के बैनर तले पश्चिम बर्धमान जिला शासक को एक लिखित ज्ञापन सौंपा था और उन्होंने इलाके ने चल रही अवैध पत्थर खदान को अविलम्ब बंद करवाने की मांग की थी, यह सूचित करते हुए की इलाके मे चल रही अवैध पत्थर खदान के कारण इलाके मे प्रदुषण तो फ़ैल ही रहा है, साथ मे पत्थर खदान मे पत्थर तोड़ने के लिये तेज धमाके भी किए जा रहे है, इसके अलावा पत्थर खदान के विस्तार के लिये हरे भरे पेड़ों की कटाई भी की जा रही है, जिससे उनका जल, जंगल और जमीन खतरे मे पड़ चूका है, लोगों को सांस लेने मे तकलीफें हो रही हैं, ऐसे मे आदिवासी समाज द्वारा उनका विरोध करने पर पुलिस और राजनितिक दलों के द्वारा उनको किसी झूठे केस मे फंसाने की धमकी दी जाती है, जिससे तंग आकर अब आदिवासी समाज एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, ।

सूत्रों की अगर माने तो बराबनी गोरंडी इलाके के कास्कूली मे चल रही अवैध पत्थर खदान और क्रेसर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपए की चुना लगाते पुलिस और जिला प्रशासन की आँखों मे धूल झोंककर अवैध रूप से पत्थर खदान और क्रेसर मशीन चला रहे हैं, सूत्रों की अगर माने तो पत्थर खदान चलाने के लिये राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नियम के अनुसार पत्थर खदान के लिये अप्लाई करने वाले आवेदक के पास करीब साढ़े सात बीघा जमीन होनी चाहिए, जिसमे करीब 5 से 10 कट्ठा जमीन आवेदक के नाम पर होनी चाहिए, जिससे यह साबित हो सके की वह जिस जगह पत्थर का खदान चलाना चाहता है, वहाँ का वह रैयति है, जिसके बाद वह वेस्ट बंगाल मिनरलस डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कोरपोरेशन लिमिटेड के पास वन और जियोलॉजिकल विभाग का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेकर एक माइनिंग मैप के साथ आवेदन करना होगा, जिस आवेदन के बाद वेस्ट बंगाल मिनरलस डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कोरपोरेशन लिमिटेड आवेदन कॉपी की जाँच करने के लिये सम्बंधित एसडीएलआरओ अधिकारी को भेजने का काम करती है, जिसके बाद बीएलआरओ आवेदक द्वारा किए गए आवेदन की मिली कॉपी के आधार पर उस जगह की जाँच करते हैं, जिस जगह पर आवेदक ने पत्थर खदान खोलने के लिये आवेदन जमा कराए थे, ।

जाँच के बाद बीएलआरओ अपनी रिपोर्ट बनाकर वेस्ट बंगाल मिनरलस डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कोरपोरेशन लिमिटेड को भेज देती है, जिसके बाद वेस्ट बंगाल मिनरलस डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कोरपोरेशन लिमिटेड आवेदक को एक एलवाई कॉपी देती है, जिससे यह साबित होता है की आवेदक द्वारा पत्थर खदान के लिये किया गया आवेदन सही है और वह जगह पत्थर खदान चलाने योग्य है, जिसके बाद पत्थर खदान चलाने के लिये आगे की प्रोसेस शुरू होती है, आवेदक को मिली एलवाई कॉपी कोलकाता स्थित इसी डिपार्टमेंट के पास जाती है, जहाँ बीएलआरओ या फिर एसडीएलआरओ, वन विभाग, जियोलॉजीस्ट, चिप माइनिंग ऑफिसर सहित इसी बोर्ड के सेकेट्री की बैठक होती है, जिस बैठक मे आवेदक के द्वारा आवेदन किए गए तमाम दस्तावेजों की एक बार फिर से पड़ताल शुरू होती है, जिस पड़ताल के बाद आवेदक को इसी सर्टिफिकेट दी जाती है, इसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद मामला सिटीई डिपार्टमेंट मे चला जाता है, वहाँ भी तमाम कागजातों की जाँच के बाद सिटीई सर्टिफिकेट मिल जाता है, सिटीई सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही आवेदक पत्थर खदान चलाने के लिये जंगल की साफ -सफाई से लेकर मिट्टी की कटाई कर सकता है, जिसके बाद मामला सिटीओ दफ़्तर चला जाता है, सिटीओ दफ़्तर से मिली सर्टिफिकेट के बाद आवेदक पत्थर खदान चलाने के लिये योग्य उम्मीदवार बन जाता है, ऐसे मे आवेदक को पत्थर खदान मे ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग करने के लिये डिजिएमएस से भी परमिशन लेने की जरुरत पड़ती है, डिजिएमएस से परमिशन मिलने के बाद आवेदक पुरे तरीके से पत्थर खदान कानूनी तौर पर वह भी वैध तरीके से पत्थर खदान चला सकता है, ऐसे मे पत्थर खदान से निकले पत्थर को बेचने के लिये उसे तमाम कागजात एसडीएलआरओ कार्यालय मे जमा करने होते हैं, जहाँ से आवेदक को सरकारी चलान उपलब्ध होता है, जिस सरकारी चलान के आधार पर आवेदक अपने पत्थर खदान से पत्थर बेच सकता है, ऐसे मे बराबनी गोरंडी के कास्कूली मे चल रहे अवैध रूप से पत्थर खदान चलाने वाले पत्थर माफिया पुलिस और जिला प्रशासन ही नही बल्कि राज्य सरकार के तमाम नियमों को ताख पर रखकर जमकर चांदी काट रहे हैं और प्रतिदिन करोड़ों रुपए के सरकारी राजस्व का चुना भी लगा रहे हैं, स्थानीय लोगों की अगर माने तो इलाके मे स्थित अवैध पत्थर खदान मे दिन भर पत्थर की कटाई चलती है और रात के अंधेरे मे पत्थरों की अवैध रूप से सफलाई होती है, जिस मामले पर आदिवासी समाज द्वारा शिकायत मिलने के बाद भी पुलिस और जिला प्रशासन सहित तमाम सरकारी महकमा मौन है

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Mr. Chandan | Senior News Editor Profile Mr. Chandan is a highly respected and seasoned Senior News Editor who brings over two decades (20+ years) of distinguished experience in the print media industry to the Bengal Mirror team. His extensive expertise is instrumental in upholding our commitment to quality, accuracy, and the #ThinkPositive journalistic standard.

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