Asansol : फाइलों में चलती रही सफाई, और शहर… डस्टबिन बन गया… शहर कचरे में डूबा है,और कुर्सियों पर सन्नाटा छाया है….
बंगाल मिरर, आसनसोल: बीते आठ दिनों से ठप पड़ी सफाई व्यवस्था ने आसनसोल शहर को गहरी बदहाली में धकेल दिया है। नगर निगम के 106 वार्डों में कचरे के ढेर लग चुके हैं, प्रमुख सड़कें और बाजा र इलाके दुर्गंध से भर गए हैं। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर शहर में विरोध का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है।शुक्रवार दोपहर जिला युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आसनसोल नगर निगम कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मेयर कक्ष के दरवाजे पर शहर की बदहाली की तस्वीरें चिपकाकर नगर निगम को आईना दिखाने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने आसनसोल को “डस्टबिन शहर” कहकर संबोधित करते हुए तत्काल सफाई व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।















जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौविक मुखर्जी ने कहा कि नगर निगम के सफाई कर्मी वेतन, पीएफ और ईएसआई जैसी जायज़ मांगों को लेकर कार्यबहिष्कार पर हैं, लेकिन नगर निगम ने अब तक उनसे बातचीत करने की पहल नहीं की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “क्लीन आसनसोल, ग्रीन आसनसोल” का नारा अब पोस्टरों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में पूरा शहर कचरे में डूबा है।
नारे थे शहर को चमकाने के,
हकीकत में कचरा सज गया,
फाइलों में चलती रही सफाई,
और शहर… डस्टबिन बन गया।
इधर, आठ दिनों से जारी सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते आसनसोल दक्षिण थाना से लेकर बाजार इलाकों तक सड़कों पर कचरा फैला हुआ है। आवारा मवेशियों की मौजूदगी ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से कर अदा करते हैं, इसके बावजूद नगर निगम की लापरवाही से शहर गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सफाई शुरू नहीं हुई तो डायरिया, डेंगू और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
शहर पूछ रहा है—
क्या टैक्स का इस्तेमाल सिर्फ पोस्टर छापने के लिए होता है?
वहीं दूसरी ओर, आसनसोल राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शुक्रवार को सड़कों पर उतरे। कांग्रेस नेता प्रसेनजित पुईतंडी ने कहा कि यह आंदोलन शहर को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो शहर का सारा कचरा ट्रकों में भरकर नगर निगम कार्यालय के सामने रखकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सफाई व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ वामफ्रंट ने भी शुक्रवार सुबह विरोध पदयात्रा निकाली, जो नगर निगम तक पहुंची। वामफ्रंट नेता लोकनाथ चटर्जी ने आरोप लगाया कि नगर निगम न्यूनतम नागरिक सेवा देने में भी असमर्थ साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी अपनी वैध मांगों—पीएफ और ईएसआई—को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और वामफ्रंट उनके संघर्ष के साथ खड़ा है।
शहर कचरे में डूबा है,
और कुर्सियों पर सन्नाटा छाया है,
अगर आज भी आंख नहीं खुली,
तो कल जवाब देना भारी पड़ जाएगा।
फिलहाल सवाल यही है कि
क्या नगर निगम और प्रशासन इस बदहाली से सबक लेंगे,
या आसनसोल यूं ही
“डस्टबिन शहर” कहलाता रहेगा।
आसनसोल नगर निगम के सफाई कर्मचारी आठ दिनों से हड़ताल पर हैं, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। मेयर विधान उपाध्याय ने कहा कि कर्मचारियों को प्रतिदिन 407 रुपये (357 वेतन + 50 पीएफ) मिलते हैं और अगले दो साल तक वेतन वृद्धि फिलहाल संभव नहीं है।उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की अन्य मांगों जैसे ईएसआई और प्रोविडेंट फंड पर सहानुभूति के साथ विचार किया जा रहा है और प्रोविडेंट फंड की सुविधा शुरू भी हो चुकी है। निगम गंदगी साफ करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है और किसी को नौकरी से हटाना नहीं चाहता, लेकिन आम जनता को परेशानी से बचाना भी जिम्मेदारी है।
आसनसोल अब शहर नहीं, सवाल बन चुका है।
सवाल सफाई का नहीं,
सवाल सिस्टम की सफाई का है।
अब देखना ये है—
क्या प्रशासन नींद से जागेगा?
या आसनसोल यूं ही
क्लीन से डस्टबिन
का सफर तय करता रहेगा?
कैमरा और कलम—
सवाल पूछते रहेंगे।

