Asansol निजी स्कूलों में राइट टू एजुकेशन एक्ट का उल्लंघन : सिंटू
बंगाल मिरर, आसनसोल: भारत सरकार द्वारा 2012 में राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू किया गया था इसमें यह सुनिश्चित किया गया था कि भारत में रहने वाले हर एक वर्ग के बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिले इस एक्ट के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों की भर्ती का प्रावधान रखा गया था इसके तहत निजी स्कूलों को यह आदेश दिया गया था कि वह अपने स्कूलों में 25% सीट पर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करें लेकिन देखा जा रहा है कि पश्चिम बर्दवान जिले में सरकार के इस कानून राइट टू एजुकेशन एक्ट का उल्लंघन हो रहा है इस बारे में सिंटू कुमार भुंईया ने 19 दिसंबर 2025 को पश्चिम बर्धमान के जिला शासक से मुलाकात के और इस तरफ उनका ध्यान आकर्षित किया और उनसे अनुरोध किया था कि सरकार के इस कानून का पालन करवाया जाए ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को भी शिक्षित होने का अवसर मिले जिला शासक ने आश्वासन दिया था कि इस पर जरूर उचित कार्रवाई की जाएगी लेकिन देखा जा रहा है कि इसके बाद भी निजी स्कूल सरकार के इस कानून के पालन में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं।















इसे देखते हुए सिंटू कुमार भुंईया द्वारा 7 फरवरी को पश्चिम बर्दवान जिले के उन स्कूलों के नाम की सूची के साथ एक और आवेदन जिला शासक के समक्ष रखा गया जो स्कूल सरकार के इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं इस मौके पर एडीएम एजुकेशन भी मौजूद थे और उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर सरकार के कानून का उल्लंघन हो रहा है तो जरूर कार्रवाई की जाएगी और निजी स्कूलों को सरकारी नियम मानने के लिए बाध्य किया जाएगा सिंटू कुमार भुंईया ने कहा कि पश्चिम वर्तमान जिले के निजी स्कूल सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ तो उठा रहे हैं लेकिन सरकार के नियमों के पालन में कोताही बरत रहे हैं जिसका प्रतिकूल असर समाज में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के शिक्षा पर पड़ रहा है उन्होंने जिला शासक से अनुरोध किया कि इस तरफ वह ध्यान दें और निजी स्कूलों को सरकारी नियम मानने के लिए बाध्य करवाएं


