Asansol : नेताओं के अंतर्द्वंद्व के कारण समस्या, धमकाने की बजाय समाधान पर करें फोकस : कृष्णेंदु
बंगाल मिरर, आसनसोल : पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। चुनावी माहौल के बीच आशा कर्मियों के बाद अब सफाई कर्मियों के आंदोलन ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस सरकार की परेशानियां बढ़ा दी हैं। वेतन वृद्धि, पीएफ, ईएसआई सुविधा और कैजुअल स्टाफ का दर्जा देने की मांग को लेकर सफाई कर्मी और आशा कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि फिलहाल निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर है और अगले दो वर्षों तक वेतन वृद्धि संभव नहीं है, हालांकि अन्य मांगों पर विचार किया जा सकता है।














पिछले कई दिनों से आसनसोल शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। इसका सीधा असर आम लोगों के जनजीवन पर पड़ रहा है और लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर अब विपक्षी दल भी सड़क पर उतर आए हैं। भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम ने अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कहीं सड़क पर जमा कचरे को साफ कर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है, तो कहीं आसनसोल नगर निगम का घेराव कर कर्मचारियों की मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।
मामले में भाजपा के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य और राज्य नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने तृणमूल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों की मुख्य मांगें वेतन वृद्धि, पीएफ, ईएसआई सुविधा और कैजुअल स्टाफ का दर्जा देने से जुड़ी हैं। नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय के अनुसार, पिछले वर्ष वेतन में बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इस वर्ष निगम की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण अगले दो वर्षों तक वेतन बढ़ाना संभव नहीं है।
पीएफ को लेकर निगम प्रशासन का कहना है कि सफाई कर्मियों के खाते तो खोले गए हैं, लेकिन उनमें अभी तक राशि जमा नहीं हो पाई है। इस पर कृष्णेंदु मुखर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटी जा रही है, तो वह पैसा आखिर जा कहां रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द सफाई कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भाजपा राज्यभर में जोरदार आंदोलन शुरू करेगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आज पूरा शिल्पांचल कूड़े से पटता जा रहा है, जिसके लिए पूरी तरह से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया की समस्या समाधान के बजाय सफाई कर्मियों को डराया धमकाया जा रहा है उनके पास कोई कॉल रिकॉर्डिंग भी है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि का नेताओं के अंतर्द्वंद्व के कारण समस्या पैदा हुई है।
फिलहाल सफाई कर्मियों का आंदोलन और विपक्षी दलों का दबाव सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।





