Asansol में MG का किला भेदने को कौन होगा भाजपा का सारथी ?
बंगाल मिरर, आसनसोल : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट, जो हमेशा से राज्य की हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक रही है, इस बार भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर ‘टिकट की रेस’ अब खुलेआम सड़कों पर दिखने लगी है। आसनसोल उत्तर में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि **’कमल’** के निशान के साथ चुनावी मैदान में कौन उतरेगा? मुकाबला मुख्य रूप से दो चेहरों के बीच सिमटता नजर आ रहा है, जिन्होंने अपनी सक्रियता से राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है।














1. कृष्णा प्रसाद: ‘जनसंपर्क’ के जरिए दावेदारी**
समाजसेवी **कृष्णा प्रसाद** ने पिछले कुछ समय में अपनी छवि एक जमीन से जुड़े नेता के रूप में पेश की है। उनके समर्थकों का मानना है कि:
* वे लगातार सामाजिक कार्यों और जनता के सुख-दुख में शामिल हो रहे हैं।
* भाजपा के लिए उनका जनसंपर्क अभियान काफी आक्रामक है।
* स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ एक ‘जननेता’ के रूप में उभर रही है।
**2. कृष्णेंदु मुखर्जी: अनुभवी चेहरा और ‘होर्डिंग वॉर’**
वहीं दूसरी ओर, राज्य स्तर के नेता **कृष्णेंदु मुखर्जी** भी पीछे नहीं हैं। 2021 के चुनावों में कड़ी टक्कर देने वाले मुखर्जी** एक बार फिर मैदान में ताल ठोक रहे हैं। शहर में उनके द्वारा लगाई गई **’परिवर्तन यात्रा’** की होर्डिंग्स उनकी मजबूत दावेदारी का प्रमाण दे रही हैं।
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### **होर्डिंग्स की जंग की चर्चा**
आसनसोल की सड़कों पर इस समय एक अजीब सी **’होर्डिंग वॉर’** देखने को मिल रही है।
* दोनों ही नेता भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ अपनी तस्वीरें लगाकर खुद को असली ‘सारथी’ साबित करने में जुटे हैं।* अलग-अलग गुटों में बंटे कार्यकर्ताओं के कारण पार्टी के भीतर एक ‘रस्साकशी’ का माहौल बन गया है।
> **क्या कहता है राजनीतिक गणित?**
> आसनसोल उत्तर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और मंत्री मलय घटक का दबदबा रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह किसी ऐसे चेहरे को उतारे जो न केवल लोकप्रिय हो, बल्कि पार्टी के भीतर की इस अंदरूनी खींचतान को भी थाम सके।
फिलहाल जनता और कार्यकर्ता दोनों असमंजस में हैं। क्या भाजपा किसी पुराने चेहरे पर भरोसा करेगी या ‘समाजसेवी’ कृष्णा प्रसाद का सामाजिक कार्ड काम आएगा? या फिर दिल्ली और कोलकाता के गलियारों से कोई **’सरप्राइजचेहरा’** सामने आएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। मलय घटक का ‘अभेद किला’: मलय घटक इस क्षेत्र से लगातार जीतते आ रहे हैं और राज्य सरकार में मंत्री होने के नाते उनका विकास कार्यों पर गहरा प्रभाव है।
संगठन की मजबूती: कृष्णा प्रसाद अपनी सामाजिक छवि और ‘नए चेहरे’ के तौर पर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, जबकि कृष्णेंदु मुखर्जी के पास पार्टी के पुराने कैडर और संगठन का अनुभव है।
विधानसभा चुनाव 2021: कांटे की टक्कर
2021 के चुनाव में पूरे बंगाल की नजरें इस सीट पर थीं। भाजपा ने उस समय कृष्णेंदु मुखर्जी को मैदान में उतारा था, जबकि TMC की ओर से दिग्गज नेता मलय घटक थे।
पार्टी प्रत्याशी वोट प्रतिशत परिणाम
TMC मलय घटक ~50.5% विजयी
BJP कृष्णेंदु मुखर्जी ~42.5% उप-विजेताजीत का अंतर: लगभग 21,000 वोट।
विशेष बात: भाजपा ने शहरी इलाकों में काफी बढ़त बनाई थी, लेकिन ग्रामीण और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में TMC भारी पड़ी।
2. विधानसभा चुनाव 2016: TMC का दबदबा
2016 में भाजपा उतनी मजबूत नहीं थी, और मुकाबला मुख्य रूप से TMC और वाममोर्चा (Left-Congress Alliance) के बीच था।
विजेता: मलय घटक (TMC)
अंतर: लगभग 23,000 वोट से जीत।
BJP की स्थिति: उस समय भाजपा तीसरे स्थान पर थी, लेकिन उसने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी थी।





