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यहां आधी रात से लग रही लाइन

जंग जीतने से कम नहीं AADHAR बनवाना

बंगाल मिरर, राहुल पासवान, सांकतोड़िया ः जंग जीतने से कम नहीं AADHAR बनवाना । यहां आधी रात से लग रही लाइन। आधार कार्ड बनवाने को लेकर डिसरगढ़ उप डाकघर में उमड़ रही भारी भीड़ से उपभोक्ताओं को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। यहां कई बात मारपीट लड़ाई झगड़े तक की नौबत उत्पन्न हो चुकी है।

पुराने कार्ड में गबड़ी ने बढ़ा दी परेशानी
रात से ही आधार के लिए कतार में खड़ी महिलायें


जानकारी के अनुसार डाकघरों में आधार कार्ड बनवाए जाने को लेकर सरकारी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। लेकिन अभी भी यह सुविधा कुछ ही जान घरों में उपलब्ध हो पाई है। डिसरगढ़ उपडाकघर के दायरे में काफी सारे क्षेत्र आते हैं। जानकारों का कहना है कि मुख्य विडंबना यह है कि आधार कार्ड बनवाने के दौरान पहले जिन हाथों में इसका कार्य सौंपा गया था उन्होंने लोगों के नाम पाते उम्र आदि में काफी गड़बड़ी कर दी थी। अतः इन आधार कार्डों का उपभोक्ता समुचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। लिहाजा अब नए आधार कार्ड बनवाने के साथ ही साथ संशोधन करवाने वालों की भीड़ को संभालना पड़ रहा है।

कोरोना संकट के कारण आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी काफी धीमी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि इसका वजह जानकारी का अभाव है।
कई जानकारों का यह भी कहना है कि डिसरगढ़, सांकतोड़िया आदि के स्थानीय लोग कुल्टी, बराकर, चिरकुंडा, कुमारधुबी, जामुड़िया सहित अन्य ऐसे ही जगहों पर रहे अपने सगे संबंधियों को भी आधार कार्ड बनवाने के लिए यहां आमंत्रित करने लगे हैं। इसके चलते यहां काफी रात से ही लोगों की लाइन देखी जा सकती है।

लोगों का आरोप यह भी है कि लाइन में लगे लोगों को अगर आधार कार्ड बनाने में जुटे कर्मी नाम दर्ज कर एक संख्या निर्धारित कर, उन्हें दूसरी सुविधा जनक तिथि लगाकर दूसरे समय पर बुला लें तो भी कुछ सुविधा हासिल हो। बहर हाल आधार कार्ड बनवाने को लेकर उमड़ने वाली भीड़ स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी का वजह बन रहे हैं।

News Editor

Mr. Chandan | Senior News Editor Profile Mr. Chandan is a highly respected and seasoned Senior News Editor who brings over two decades (20+ years) of distinguished experience in the print media industry to the Bengal Mirror team. His extensive expertise is instrumental in upholding our commitment to quality, accuracy, and the #ThinkPositive journalistic standard.

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