ASANSOL

Paschim Bardhaman SIR 2025 : 3 लाख वोटरों के कटेंगे नाम ? सबसे अधिक आसनसोल उत्तर में

मतदाता सूची अद्यतनीकरण में दुर्गापुर पूर्व सबसे आगे, 1.31 लाख से अधिक मतदाता हुए ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित

बंगाल मिरर, आसनसोल: पश्चिम बर्दवान जिले में आगामी चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूची संशोधन और सत्यापन का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन द्वारा 11 दिसंबर 2025 को जारी की गई ‘प्रिंटिंग और वितरण स्थिति रिपोर्ट’ (Printing & Distribution Status Report) के अनुसार, जिले के 9 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 23,27,111 फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 86.83% का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

File photo

रिपोर्ट के मुख्य अंश:1. डिजिटलीकरण में दुर्गापुर पूर्व अव्वल:आंकड़ों के मुताबिक, दुर्गापुर पूर्व (276) विधानसभा क्षेत्र में कार्य सबसे तेजी से हुआ है, जहां वितरित किए गए 2,66,112 फॉर्मों में से 89.81% का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इसके बाद पांडवेश्वर (88.41%) और दुर्गापुर पश्चिम (87.99%) का स्थान है। वहीं, आसनसोल उत्तर (281) में डिजिटलीकरण की दर सबसे कम 85.27% दर्ज की गई है।

2. 3 लाख से ज्यादा फॉर्म ‘असंग्रहणीय’ (Uncollectable):

जिले भर में कुल 3,06,460 फॉर्म (कुल वितरण का 13.17%) ‘अनकलेक्टेबल’ यानी असंग्रहणीय श्रेणी में पाए गए हैं। इसका अर्थ है कि इन मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया या वे अब उस पते पर मौजूद नहीं हैं। * आसनसोल उत्तर में सबसे ज्यादा मामले: असंग्रहणीय फॉर्मों का सबसे अधिक प्रतिशत आसनसोल उत्तर में 14.73% और कुल्टी में 14.67% है।

* सबसे कम: दुर्गापुर पश्चिम में यह आंकड़ा सबसे कम 10.19% है।3. फॉर्म रद्द/वापसी के प्रमुख कारण:रिपोर्ट में असंग्रहणीय फॉर्मों के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं: * स्थायी रूप से स्थानांतरण (Permanently Shifted): जिले भर में 1,31,160 मतदाता अपने पुराने पते से स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके हैं। यह सबसे बड़ा कारण है। * मृत्यु (Death): कुल 96,547 मतदाताओं की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जिसके कारण उनके फॉर्म रद्द किए जाएंगे।

* लापता/अनुपस्थित (Untraceable/Absent): लगभग 71,361 मतदाता सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले या लापता हैं।विधानसभा-वार प्रमुख आंकड़े (एक नज़र में):| विधानसभा क्षेत्र | कुल वितरित फॉर्म | डिजिटलीकरण (%) |

कुल अनकलेक्टेबल फॉर्म | प्रमुख कारण (शिफ्टेड) ||—|—|—|—|—|| पांडवेश्वर | 2,18,575 | 88.41% | 25,334 | 15,274 || दुर्गापुर पूर्व | 2,66,112 | 89.81% | 27,106 | 9,738 || दुर्गापुर पश्चिम | 2,79,070 | 87.99% | 33,524 | 12,849 || रानीगंज | 2,58,246 | 86.24% | 35,524 | 19,678 || जमुरिया | 2,34,113 | 85.63% | 33,640 | 19,385 || आसनसोल दक्षिण | 2,86,615 | 86.30% | 39,252 | 15,579 || आसनसोल उत्तर | 2,89,622 | 85.27% | 42,653 | 12,933 || कुल्टी | 2,59,697 | 85.33% | 38,110 | 13,192 || बाराबनी | 2,35,061 | 86.68% | 31,317 | 12,532 |प्रशासन इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

कुल काम का स्टेटस: जिले में कुल 23.27 लाख फॉर्म बांटे गए थे। इनमें से लगभग 87% डेटा को कंप्यूटर में दर्ज (डिजिटाइज) कर लिया गया है। इस काम में दुर्गापुर पूर्व सबसे आगे है, जहां लगभग 90% काम पूरा हो चुका है, जबकि आसनसोल उत्तर और कुल्टी थोड़ा पीछे चल रहे हैं।

क्यों रद्द हो सकते हैं 3 लाख फॉर्म?

सर्वेक्षण के दौरान जिन 3 लाख से अधिक लोगों का सत्यापन नहीं हो पाया, उनके पीछे तीन बड़े कारण मिले हैं:जगह बदल ली (Shifted): सबसे ज्यादा 1 लाख 31 हजार लोग अपना पुराना घर छोड़कर हमेशा के लिए दूसरी जगह चले गए हैं।मृत्यु (Death): करीब 96,547 मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

लापता (Untraceable): लगभग 71,361 मतदाता अपने दिए गए पते पर मिले ही नहीं या लापता हैं।किस इलाके का क्या हाल है?आसनसोल उत्तर और कुल्टी: यहाँ मतदाता सूची में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिलने की संभावना है। इन दोनों इलाकों में लगभग 14.7% फॉर्म ‘असंग्रहणीय’ पाए गए हैं, जो जिले में सबसे ज्यादा है।रानीगंज और जमुरिया: इन इलाकों में जगह छोड़कर जाने वालों (Shifted) की संख्या सबसे ज्यादा है। रानीगंज में करीब 19,600 और जमुरिया में 19,300 लोग स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए हैं।दुर्गापुर पूर्व: यहाँ का डेटा सबसे साफ-सुथरा है। यहाँ केवल 10% फॉर्म ही असंग्रहणीय श्रेणी में आए हैं, जो जिले में सबसे कम है।

News Editor

Mr. Chandan | Senior News Editor Profile Mr. Chandan is a highly respected and seasoned Senior News Editor who brings over two decades (20+ years) of distinguished experience in the print media industry to the Bengal Mirror team. His extensive expertise is instrumental in upholding our commitment to quality, accuracy, and the #ThinkPositive journalistic standard.

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