शिल्पांचल में टिकट से पहले ‘ट्वीट-युद्ध’ शुरू, जनता बोली—नेता चाहिए, हीरो नहीं !
बंगाल मिरर, एस सिंह: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब गिनती के दिन ही बचे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज़ हैं और प्रत्याशी चयन का ‘महायज्ञ’ अंतिम दौर में पहुंच चुका है। इसी बीच शिल्पांचल क्षेत्र में कुछ नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।














सूत्रों की मानें तो आसनसोल के पूर्व सांसद और वर्तमान मंत्री बाबुल सुप्रियो समेत कुछ चर्चित चेहरों को किसी सीट से मैदान में उतारा जा सकता है। बस फिर क्या था—प्रत्याशी घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर विरोध का ‘ट्रेलर’ रिलीज़ हो गया।
फेसबुक-व्हाट्सएप बना राजनीतिक अखाड़ा
घोषणा से पहले ही फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स पर पोस्टों की बाढ़ आ गई है। कहीं लिखा है—
“हमें विधायक चाहिए, प्लेबैक सिंगर नहीं।”
तो कहीं तंज है—
“वोट लेकर चले जाएंगे शूटिंग पर, पीछे रह जाएगी जनता और टूटी सड़कें।”
सोशल मीडिया अब चुनाव प्रचार से पहले ‘जनता की अदालत’ बन चुका है, जहां हर पोस्ट एक फैसला सुनाने को तैयार है।
स्थानीय बनाम सेलिब्रिटी की लड़ाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसे नेता चाहिए जो मोहल्ले की नाली से लेकर अस्पताल की दवा तक की चिंता करे, न कि ऐसे चेहरे जो चुनाव जीतने के बाद ‘स्टेज शो’ में व्यस्त हो जाएं।
एक पोस्ट में तो यहां तक लिखा गया—
“नेता वही जो बारिश में भी हमारे साथ खड़ा रहे, न कि बारिश में गाने की रील बनाए।”
दलों के लिए मुश्किल सवाल
इस पूरे विरोध ने राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल यह है कि लोकप्रिय चेहरा उतारें या जमीनी कार्यकर्ता? स्टार पावर दिखाएं या लोकल पावर पर भरोसा करें? क्योंकि अब जनता सिर्फ पोस्टर नहीं देखती, प्रोफाइल भी चेक करती है।
इस विरोध में भले ही व्यंग्य और मज़ाक की चाशनी हो, लेकिन संदेश साफ है—
“हमें नेता चाहिए, कलाकार नहीं। हमें विकास चाहिए, डायलॉग नहीं।”अब देखना यह है कि पार्टियां जनता की इस ‘डिजिटल पंचायत’ की सुनती हैं या फिर एक बार फिर टिकट का फैसला एसी कमरों में ही होता है।
फिलहाल, शिल्पांचल में चुनाव से पहले ही सियासी ‘रिहर्सल’ ज़ोरों पर है—और जनता, मोबाइल हाथ में लेकर, जज की कुर्सी पर बैठ चुकी है।


