“NCERT से परीक्षा, लेकिन किताब स्कूल से ही खरीदो!” – Asansol के प्राइवेट स्कूलों की नई ‘शिक्षा नीति’
बंगाल मिरर, आसनसोल। शिक्षा का मंदिर अब धीरे-धीरे “पैकेज सिस्टम” में बदलता जा रहा है। CBSE बोर्ड से संबद्ध प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और अभिभावकों की परेशानी इन दिनों चरम पर है। मामला कक्षा 10 के छात्रों से जुड़ा है, जहां बोर्ड की परीक्षा स्पष्ट रूप से NCERT की पुस्तकों से होने वाली है, लेकिन स्कूल प्रबंधन अपनी “विशेष” अध्ययन सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहा है।अब सवाल यह उठता है कि जब परीक्षा NCERT से ही होनी है, तो यह “स्कूल स्पेशल पैकेज” आखिर किस काम का? शायद यह नई शिक्षा नीति का “अदृश्य अध्याय” है, जिसे केवल स्कूल प्रबंधन ही पढ़ और समझ पा रहा है!














अभिभावकों का कहना है कि स्कूल द्वारा दी जा रही किताबें और नोट्स महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं, और साफ शब्दों में कहा जाता है—“यही खरीदना होगा, नहीं तो बच्चे की पढ़ाई प्रभावित होगी।” यानी शिक्षा कम, दबाव ज्यादा!एक अभिभावक ने व्यंग्य करते हुए कहा, “लगता है अब किताब नहीं, ‘एडमिशन के साथ बुक पैकेज’ भी अनिवार्य हो गया है। अगला कदम शायद यूनिफॉर्म के साथ टिफिन भी स्कूल से ही लेना पड़े!”
जानकारों की मानें तो CBSE के नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। लेकिन नियम किताबों में ही अच्छे लगते हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।
क्या करें अभिभावक?
सबसे पहले स्कूल प्रबंधन से लिखित में स्पष्टीकरण मांगें।CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें।जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत दें।अन्य अभिभावकों के साथ मिलकर सामूहिक विरोध दर्ज कराएं।फिलहाल, आसनसोल के अभिभावक यही सोच रहे हैं कि बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान दें या “स्कूल के बनाए शॉपिंग लिस्ट” को पूरा करें। शिक्षा के इस बाजार में असली विद्यार्थी कौन है—बच्चा या अभिभावक—यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
