चार साहिब जादो के नाम पर बाल दिवस मनाए जाने की मांग कर रही है सिख महिलाएं

बंगाल मिरर, दलजीत सिंह,   रानीगंज  –
 सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादो  ने देश की सुरक्षा की खातिर एवं देश  के मान सम्मान के लिए अपनी शहादत दी थी उन के नाम पर ही बाल दिवस मनाया जाना चाहिए यह बातें  हनी कौर ने कही   l

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सिख समाज की बलदीप कौर   ने कहा कि पूरे भारत के सिख समाज के लोग प्रधानमंत्री से यह मांग कर रहे हैं कि चार साहिब जादो  के नाम से बाल दिवस मनाने की घोषणा होनी चाहिए,  भारत के कई सांसदों ने भी इस मांग को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा है  हम शिल्पांचल  की महिलाएं भी यही मांग प्रधानमंत्री से करते हैं  l     कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के दो बड़े साहिब जादे अजीत सिंह उम्र *18* एवं जुझार सिंह उम्र( 14 )मुगलों की सेना से जंग के मैदान में लड़ते हुए भारी पराक्रम  दिखाने के बाद शहीद हुए थे,  वहीं छोटे दो साहिबजादो  जोरावर सिंह उम्र (नो )एवं फतेह सिंह उम्र( 7) को सरहिंद के गवर्नर ने गुरु जी की माता के साथ बंदी बना लिया था जब दोनों छोटे  साहिबजादो  ने अपना धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म कबूल करने से मना किया तो उन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया  देश की सुरक्षा खातिर के इस सर्वोच्च बलिदान जैसी और कोई उदाहरण दुनिया में नहीं मिलती इसलिए भारत सरकार को बाल दिवस मनाने की घोषणा  गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादो  के नाम पर ही करनी चाहिए   l सिख महिला परमजीत कौर  ने बतलाया कि जवाहरलाल नेहरू को भारत के लोग चाचा नेहरू के नाम से जानते हैं इसलिए जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस पर चाचा दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए जबकि चार साहबजादो  के नाम पर बाल दिवस मनाने की स्वीकृति मिलनी चाहिए l सिख महिला ज्योति कौर ने कहा कि संसद में कई सांसदों ने इस विषय पर प्रधानमंत्री को लिखित देकर यह मांग प्रधानमंत्री से की है हम लोग भी अपने स्तर से  प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन करके यह मांग करेंगे कि जल्दी ही देश के प्रधानमंत्री को चार साहिब जादो  के नाम पर बाल दिवस मनाने की स्वीकृति की घोषणा करनी चाहिए l वही सिख  महिला लक्ष्मी  कौर ने कहा कि प्रत्येक शहर के रहने वाले सिख पुरुष महिलाओं को चार साहिब जादो के नाम पर भारत सरकार से बाल दिवस मनाने की स्वीकृति की मांग रखना के लिए मुहिम शुरू की जानी चाहिए उन्होंने कहा कि चार साहिबजादो  ने शांति न्याय और देश के धर्म की पहरेदारी के लिए शहादत दी थी l