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लॉकडाउन: कोलकाता में हर दिन नाली में बह रहा 2 लाख लीटर दूध

मिठाई की दुकानें बंद बना कारण
– रोजाना करीब 50 करोड़ की क्षति का अनुमान
बंगाल मिरर, दलजीत सिंह,  कोलकाता.
देशभर में लागू लॉकडाउन के चलते पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाके में आधे से ज्यादा ताजा दूध का उत्पादन बर्बाद हो रहा है। मिठाई की दुकानें बंद रहने के कारण रोजाना करीब 2 लाख लीटर दूध बर्बाद हो रहा है। दूध की सप्लाई मुख्य रूप से मिठाई की दुकानों पर होनी थी।

  दूध की बर्बादी से हताश डेयरी फार्म मालिकों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर इस मामले से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल मिष्ठान्न व्यवसायी समिति ने भी गत गुरुवार को मुख्यमंत्री बनर्जी को पत्र लिखकर दूध की बर्बादी रोकने के लिए दुकानें खोलने की अनुमति देने की अपील की थी। दूध का उपयोग मिठाई, पनीर, दही और खीर बनाने के लिए किया जाता है।

हर दिन 50 करोड़ का नुकसानः
जोड़ासांकू दुग्ध व्यवसायी समिति के अध्यक्ष राकेश सिन्हा ने बताया कि “मिठाई की दुकानों में ताजे दूध के उत्पादन का लगभग 60 फीसदी की खपत होती  है। लॉकडाउन के बाद दुकानें बंद होने के चलते दूध की सप्लाई थम सी गई है। जिसके चलते अधिकांश डेयरी फार्म मालिक ताजे दूध को नष्ट करने के लिए मजूबर हो रहे हैं। पड़ोसी बाजारों में लगभग आधी कीमत से दूध बेचा जा रहा है। जिससे हर दिन करीब 50 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।”
दूध से क्रीम निकालकर नुकसान कम कर रहेः
सिन्हा ने बताया कि जबकि कुछ बड़े डेयरी मालिक ताजा दूध से क्रीम को मथकर कुछ हद तक इस स्थिति से खुद को उबारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर छोटे गोशाला मालिकों के पास दूध को फेंकने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचा है। हालांकि उन्होंने डेयरियों से संपर्क किया है, लेकिन वे ताजा दूध खरीदने में असमर्थ हैं।
मदर डेयरी और सेंट्रल डेयरी की दूध खरीदने की सीमित क्षमताः
राज्य के पशुपालन मंत्री स्वपन देवनाथ ने बताया कि मदर डेयरी और सेंट्रल डेयरी अतिरिक्त दूध खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। उन्होंने बताया कि “हम रातोंरात उत्पादकता नहीं बढ़ा सकते और ना अधिक दूध खरीद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों को पनीर की आपूर्ति करने के लिए कहा है। 
पशु चारे की कमी पर चिंताः
मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में, डेयरी मालिकों ने पशु चारे की कमी पर भी चिंता जताई है। सिन्हा ने बताया कि पुश चारे की कमी के चलते छोटे डेयरी मालिकों के पास कोई विकल्प नहीं होगा तो वे मवेशियों को बेच देंगे या उन्हें छोड़ देंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है, तो लॉकडाउन खत्म होने पर यह एक गंभीर संकट पैदा करेगा।

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