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DRDO अब घरों में इस्तेमाल के लिए छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर करेगा तैयार, आयरलैंड से मंगाया गया ऑक्सीजन जनरेटर, प्रति मिनट 500 लीटर ऑक्सीजन जेनरेट करेगा


बंगाल मिरर, विशेष संवाददाता : 
देश के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन की आवश्यकता को तत्काल पूरा करने के लिए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) विभिन्न अस्पतालों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करने जा रहा है।


1 लाख 50 हजार छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार करेगा डीआरडीओ

ज्ञात हो, हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों व रक्षा संगठनों के साथ बैठक कर वर्तमान कोविड महामारी से निपटने के लिए अपना प्रयास तेज करने को कहा था। इसी का परिणाम है कि डीआरडीओ भी इस कड़ी में तेजी से कार्य कर रहा है। एक ओर जहां, डीआरडीओ ने पीएम केयर्स फंड के तहत प्रति माह 125 संयंत्र के निर्माण का भी लक्ष्य रखा है तो वहीं अब घरों में इस्तेमाल के लिए एक लाख 50 हजार छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार किए जाने का जिम्मा लिया है।   


बताना चाहेंगे, इस दिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन मजबूत चिकित्‍सा ढांचे और उपकरण के निर्माण कार्य में जुट गया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर जी. सतीश रेड्डी के मुताबिक संगठन देश के विभिन्न भागों में कई कोविड विशेष अस्पताल बना रहा है ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।



देशभर में 500 से अधिक ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करेगा डीआरडीओ

गौरतलब हो, डीआरडीओ ने पीएम केयर्स फंड के तहत प्रति माह 125 संयंत्र के निर्माण का भी लक्ष्य रखा है, जबकि तीन माह के भीतर वह देशभर में 500 से अधिक ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करेगा। इसके अलावा डीआरडीओ घरों में इस्तेमाल के लिए 1 लाख 50 हजार छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार करने जा रहा है। संगठन ने विभिन्न चिकित्सकीय उपकरण बनाने के लिए अपनी सैन्य विशेषज्ञता और ज्ञान का उपयोग इसलिए किया है ताकि मुश्किल की इस घड़ी में कोविड मरीजों को ज्यादा से ज्यादा राहत पहुंचाई जा सके।


ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में कारगर तकनीक


शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में यह मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट (एमओपी) तकनीक उपयोगी होगी। इस तकनीक से एक मिनट में 1,000 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा सकता है। डीआरडीओ के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि यह प्रणाली प्रति मिनट 190 मरीजों की जरूरत पूरा कर सकती है और 195 सिलेंडर प्रति दिन चार्ज कर सकती है। डीआरडीओ ने मेसर्स टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, बेंगलुरु को 332 और मेसर्स ट्राइडेंट न्यूमेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, कोयंबटूर को 48 मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट की आपूर्ति के आदेश दिए हैं।


आयरलैंड से मंगाया गया ऑक्सीजन जनरेटर संयंत्र भारत पहुंचा, आर्मी बेस हॉस्पिटल में लगेगा

दिल्ली कैंट के आर्मी बेस हॉस्पिटल में ऑक्सीजन का संकट खत्म करने के लिए आयरलैंड से ऑक्सीजन जनरेटर संयंत्र आ गया है, जिसे जल्द ही स्थापित किया जाएगा। यह ऑक्सीजन जनरेटर प्रति मिनट 500 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम है और 50 बेड पर 10 लीटर प्रति मिनट की आपूर्ति कर सकता है। 


प्रति मिनट 500 लीटर ऑक्सीजन जेनरेट करेगा ये ऑक्सीजन जनरेटर
 

बताना चाहेंगे, आयरलैंड से मंगाया गया ऑक्सीजन जनरेटर संयंत्र बुधवार को बेस अस्पताल पहुंचा है। अब इसे जल्द से जल्द स्थापित किए जाने की तैयारी है। यह ऑक्सीजन जनरेटर प्रति मिनट 500 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम है और 50 बेड को 10 लीटर प्रति मिनट की दर से ऑक्सीजन की आपूर्ति कर सकते हैं।


सेना ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया-कोविड मरीजों के लिए पहले से चल रहे हैं तीन अस्पताल 


दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर दिल्ली में सेना की मदद से अस्पताल बनाए जाने के लिए मदद की दिल्ली सरकार की मांग पर सेना ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि उसके पहले से यहां तीन अस्पताल चल रहे हैं, जिनमें कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। सेना की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में अलग से फील्ड अस्पताल नहीं बनाया जा सकता है। सेना की ओर से कोर्ट में कहा गया कि सेना या एयरफोर्स ऑक्सीजन के परिवहन का काम करने में मदद कर सकती है। सेना अपनी क्षमता का भरपूर इस्तेमाल कर रही है, इसलिए वो अभी अस्पताल बनाने में योगदान नहीं कर सकती है। सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने डीआरडीओ की ओर से किए गए कार्यों से भी हाईकोर्ट को अवगत कराया।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सेना का इंजीनियरिंग विंग स्टोरेज क्षमता बनाने पर काम कर सकता है। तब शर्मा ने कहा कि कोर्ट का ये सुझाव वे सेना के अफसरों के पास रखेंगे। एएसजी शर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार के नोडल अफसर इस बाबत वार रुम में कह सकते हैं। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से वकील राहुल मेहरा ने कहा कि इस पर आदेश पारित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम एक स्थान की पहचान करेंगे जहां सौ या दो सौ मीट्रिक टन ऑक्सीजन का स्टोरेज हो सके।

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