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कपड़ा और फुटवियर पर 12 % GST का विरोध किया CAIT ने

कैट के बैनर तले देश भर के कपड़ा एवं फुटवियर संगठन करेंगे राष्ट्रीय आंदोलन : सुभाष अग्रवाला

बंगाल मिरर, संजीव यादव, बराकर : उल्टे कर ढांचे ( इनवर्टेड ड्यूटी) को हटाने / ठीक करने के लिए जीएसटी कॉउन्सिल के निर्णय को लागू करते हुए केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना संख्या 14/2021 दिनांक 18.11.201 को लागू कर समस्त प्रकार के कपडे एवं फुटवियर पर जीएससटी की दर 5% से बढ़ाकर 12% कर दी है जो बेहद अनुचित एवं तर्कहीन है और सरकार द्वारा परिकल्पित उल्टे शुल्क को हटाने के मूल उद्देश्य को पूरा नहीं करता है- कहा कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह कहते हुए अफ़सोस जाहिर किया की जीएसटी कर ढांचे को सरल और युक्तिसंगत बनाने के बजाय, जीएसटी परिषद ने इसे बेहद जटिल जीएसटी कानून में तब्दील कर दिया है ! कैट ने कहा की तत्कालीन वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा बताये गए जीएसटी ढांचे के विपरीत बना दिया है।


कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सवाल यह है कि क्या उल्टा कर ( इनवर्टेड ड्यूटी ) ढांचा पूरी तरह से सही है? सूती कपड़ा उद्योग में कोई उलटा कर ढांचा नहीं था, फिर कपड़े और अन्य सूती वस्त्र सामान को 12% के दायरे में क्यों लाया गया। यहां तक कि मानव निर्मित कपड़ा उद्योग में भी, वस्त्र, साड़ी और सभी प्रकार के मेड अप के निर्माण के स्तर पर कोई उल्टा कर मुद्दा ही नहीं था। कपड़ा उद्योग के चरणों को समझे बिना इस तरह का कठोर निर्णय एक प्रतिघाटी का कदम होगा। कपड़ा और जूते जैसी बुनियादी वस्तुओं पर जीएसटी की दर को 5% से बढ़ाकर 12% करने की केंद्र सरकार की अधिसूचना का दिल्ली सहित पूरे देश में व्यापारियों द्वारा विरोध हो रहा है और कैट ने इस तरह की मनमानी के खिलाफ देश भर में एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।इस आंदोलन का नेतृत्व कैट के अंतर्गत व्यापार के दो महत्वपूर्ण व्यापार एसोसिएशन दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल एसोसिएशन (फोस्टा) द्वारा किया जाएगा। इसमें टेक्सटाइल और फुटवियर के अलावा सभी तरह के व्यापार के व्यापारिक संगठन, उनसे जुड़े कर्मचारी, कारीगर भी शामिल होंगे।


कैट के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं राष्ट्रीय मंत्री श्री सुमित अग्रवाल ने कहा की रोटी, कपड़ा और मकान जीवन की मूलभूत वस्तुएं है ! रोटी पहले ही बहुत महंगी हो गई, मकान खरीदने की स्थिति आम आदमी की है नहीं और कपडा जो सुलभ था उसको भी जीएसटी काउंसिल ने महंगा कर दिया है ! आखिर देश के आम आदमी के साथ यह किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है ! इस मामले में केवल केंद्र सरकार ही नहीं बल्कि राज्य सरकारें भी पूर्ण रूप से दोषी है क्योंकि जीएसटी काउंसिल में यह निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं ! उन्होंने मांग की है की कपडा एवं फुटवियर पर जीएसटी के बढ़ी दर को तुरंत वापिस लिए जाये ! उन्होंने कहा की कोविड के कारण व्यापार पहले ही तबाह हो चुका है और अब जब इस वर्ष से व्यापार पटरी पर आना शुरू हुआ था, ऐसे में जीएसटी की दर में वृद्धि कर व्यापार के ताबूत में कील ठोकने का काम किया गया है !


कैट के राष्ट्रीय मंत्री एवं आल इंडिया ज्वेलरी एवं गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक श्री पंकज अरोरा ने कहा की सूत्रों के अनुसार ज्ञात हुआ है की जीएसटी की फिटमेंट कमेटी ने सोने की ज्वेलरी पर जीएसटी की दर 3 % से बढ़ाकर 5 % करने की सिफारिश की है जिससे देश में गोल्ड ज्वेलरी का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा और सोने की तस्करी भी बढ़ने की भी संभावना है !


 कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर परवानी एवं राष्ट्रीय मंत्री श्री संजय पटवारी ने कहा की फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी में वर्तमान कर दर 5 % को 7 %, 12 % को 14 % एवं 18 % को 20 % करने की सिफारिश की है ! कर दर में प्रस्तावित यह वृद्धि बेहद तर्कहीन एवं औचित्यहीन है और साफ़ तौर पर फिटमेंट कमेटी की मनमानी है ! कपडा एवं फुटवियर पर वृद्धि के मामले में देश के किसी भी व्यापारी संगठन से कोई सलाह मशवरा नहीं किया गया ! जिस तरह से लगातार जीएसटी के स्वरुप को विकृत किया जा रहा है और “एक देश -एक कर” का मजाक उड़ाया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है ! उन्होंने कहा की इस वृद्धि के खिलाफ देश भर के व्यापारी लामबंद हो गए हैं और एक वृहद आंदोलन की तैयारी के लिए आगामी 28 नवम्बर को कैट ने देश के सभी राज्यों के कपड़े एवं फुटवियर व्यापारियों एवं सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की एक वीडियो के जरिये मीटिंग बुलाई है जिसमें आंदोलन की रणनीति को तय किया जाएगा !


श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी लागू करने से पूर्व तत्कालीन वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली ने अपने आवास पर कैट को जिस जीएसटी के बारे में बताया था , उस जीएसटी की धज्जियाँ उड़ा दी गई हैं और उसके स्थान पर एक बेहद जटिल जीएसटी कर प्रणाली को लागू कर दिया गया है ! प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ़ डूइंग बिज़निस तथा एक देश -एक कर की घोषणा का खुल कर मजाक उड़ाया जा रहा है ! जीएसटी की वर्तमान कर व्यवस्था ने व्यापारियों को मुंशी बना दिया है ! अधिकारी निरंकुश हो गए हैं और या तो जिम्मेदार नेताओं की कमान ढीली हो गई है या फिर वो भी व्यापारियों को प्रताड़ित करने में शामिल है ! इस स्थिति को देश भर के व्यापारी अब और अधिक बर्दाश्त नहीं करेंगे !

News Editor

Mr. Chandan | Senior News Editor Profile Mr. Chandan is a highly respected and seasoned Senior News Editor who brings over two decades (20+ years) of distinguished experience in the print media industry to the Bengal Mirror team. His extensive expertise is instrumental in upholding our commitment to quality, accuracy, and the #ThinkPositive journalistic standard.

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