Presidential election of India : जानें कौन हैं देश के राष्ट्रपति उम्मीदवार, निर्वाचित होने के बाद कौन बनाएगा कई रिकॉर्ड, कैसे होता है चुनाव, विस्तार से जानें


( Presidential election of India) देश में राष्ट्रपति चुनाव ( President of India Election) के ऐलान के बाद से उम्मीदवारों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। ऐसे में पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही राष्ट्रपति चुनाव कैंडिडेट के नामों का घोषणा कर दी है। एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू ( Draupadi Murmu ) को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा ( Yashwant Sinha ) को संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया गया है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही उम्मीदवारों का बीजेपी से कनेक्शन रहा है। आइए जानते हैं कौन हैं द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा साथ ही इनके अब तक के योगदान के बारे में…

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निर्वाचित होने पर, स्वतंत्रता के बाद पैदा हुई प्रथम राष्ट्रपति


अगर द्रौपदी मुर्मू निर्वाचित होती हैं, तो वह देश की स्वतंत्रता के बाद जन्म लेने वाली पहली राष्ट्रपति होंगी। द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ। अभी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को आजादी मिलने के बाद पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री हैं। इसके अलावा यदि वे चुनाव जीत जाती हैं तो देश में पहली बार किसी आदिवासी समुदाय की महिला राष्ट्रपति बनेंगी।

Presidential election of India



राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का शुरुआती सफर

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के पूर्व मंत्री दिवंगत बिरंची नारायण टुडू की बेटी हैं। अपने पति श्यामाचरण मुर्मू और दो बेटों को खोने के बाद, मुर्मू ने अपने निजी जीवन में बहुत त्रासदी देखी है।ओडिशा के मयूरभंज जिले के रहने वाले, मुर्मू ने राज्य की राजनीति में प्रवेश करने से पहले एक शिक्षक के रूप में शुरुआत की। विधायक बनने से पहले, मुर्मू ने 1997 में चुनाव जीतने के बाद रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद और बीजेपी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।



राज्यपाल के रूप में सेवा

द्रौपदी मुर्मू वर्ष 2000 में गठन के बाद से पांच साल का कार्यकाल (2015-2021) पूरा करने वाली झारखंड की पहली राज्यपाल हैं। वह छह साल एक माह 18 दिनों का कार्यकाल रहा। इस दौरान द्रौपदी मुर्मू विवादों से दूर रही। द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राज्यपाल बनी थीं।राजनीति में मुर्मू का करियर 2 दशकों से अधिक का है।

कुलाधिपति द्रौपदी मुमू ने अपने कार्यकाल में झारखंड के विश्वविद्यालयों के लिए चांसलर पोर्टल शुरू कराया। इसके जरिये सभी विश्वविद्यालयों के कॉलेजों के लिए साथ छात्रों का ऑनलाइन नामांकन शुरू कराया।



द्रौपदी मुर्मू का राजनीतिक सफर

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में बीजेपी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य और परिवहन की और 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं। वह मयूरभंज (2000 और 2009) के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू को ओडिशा विधानसभा द्वारा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ विधायक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।



द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी के बारे में रोचक तथ्य

एक बार निर्वाचित होने के बाद, वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और दूसरी बार महिला राष्ट्रपति होंगी। वह ओडिशा से पहली राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं और निर्वाचित होने के बाद ओडिशा राज्य से देश की पहली राष्ट्रपति बनेंगी।



द्रौपदी मुर्मू ने उम्मीदवार बनाए जाने पर क्या कहा

वहीं राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने पर द्रौपदी मुर्मू ने आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि टीवी पर नाम सुनकर उन्हें आश्चर्य के साथ खुशी भी हुई। उन्होंने कहा कि एक जनजातीय महिला को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर बीजेपी ने अपनी नीति स्पष्ट की है। बीजेपी सबका साथ, सबका विकास की नीति में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि 2021 के बाद से वह राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार होने के कारण सभी के सहयोग की कामना करती हूं और उन्हें विश्वास है कि उन्हें आवश्यक सहयोग प्राप्त होगा।



विपक्ष उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का शुरुआती सफर

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति चुनाव के लिए संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार नामित किया गया है।

यशवंत सिन्हा का जन्म 6 नवम्बर, 1937 को पटना में हुआ था। यशवंत सिन्हा ने पटना विश्वविद्यालय में ही छात्रों को पढ़ाया। वर्ष 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए सेवा में 24 से अधिक वर्ष बिताए। इस दौरान उन्होंने चार वर्षों तक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में भी सेवा दी। यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया।

राष्ट्रपति का कैसे होता है चुनाव, विस्तार से जानें चयन प्रक्रिया


भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान के बाद से राष्ट्रपति चुनाव को लेकर काफी हलचल है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो चुकी है। चुनाव आयोग के अनुसार मतदान 18 जुलाई को और परिणाम 21 जुलाई को घोषित किए जाएंगे। गौरतलब हो, देश के वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होने जा रहा है, ऐसे में नए राष्ट्रपति के चयन के लिए चुनाव होना है। इस संबंध में 15 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार 29 जून 2022 तक नॉमिनेशन फाइल किया जा सकेगा।

Presidential election of India कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव ?



राष्ट्रपति की चुनावी प्रक्रिया प्रधानमंत्री के चुनाव से बिलकुल अलग है। जहां प्रधानमंत्री लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों की बहुलता की वजह से प्रधानमंत्री बनते हैं, जबकि पीएम पद का संसद सदस्य पहले जनता द्वारा सांसद चुना जाता है। वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत राष्ट्रपति के चुनाव में देश के दोनों सदनों लोकसभा एवं राज्यसभा और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के चुने हुए प्रतिनिधियों के मतदान से उन्हें यह प्रतिष्ठित पद प्राप्त होता है। यहां एक बात जानना बेहद जरूरी है कि राष्ट्रपति के चुनाव के लिए ”एकल संक्रमणीय मत पद्धति” या ”सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम” का इस्तेमाल किया जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव सीधे नहीं करती, बल्कि उसके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि करते हैं। ऐसे में इस चुनाव में केवल जनता द्वारा सीधे चुने गए विधायकों और सांसदों को ही वोट डालने का अधिकार मिलता है। दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य शामिल नहीं होते है।

कौन हो सकता है उम्मीदवार

राष्ट्रपति के चुनाव की उम्मीदवारी प्रक्रिया भी अन्य चुनावों की अपेक्षा अलग है। राष्ट्रपति के चुनाव की उम्मीदवार को नॉमिनेशन फाइल करने के लिए 50 प्रस्तावकों एवं 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची की आवश्यकता होती है। ये प्रस्तावक और समर्थक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के सदस्यों में से कोई भी हो सकते हैं। 50 प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता से संबंधित नियम इसलिए लागू किया गया ताकि वैसे उम्मीदवार ही चुनाव प्रक्रिया में शामिल हों, जिनमें जीतने की प्रबल संभावना हो। इस प्रस्ताव प्रक्रिया में निर्वाचक मण्डल का एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नॉमिनेशन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।

वोट मूल्य की गणना

राष्ट्रपति की चुनावी प्रक्रिया निर्वाचक मण्डल के वोट मूल्य की गणना पर आधारित होता है। उम्मीदवारों के नॉमिनेशन फाइल करने के बाद सारी समीकरण वोट मूल्य की गणना पर आकर टिक जाती है। साधारण सा दिखने वाला वोट मूल्य सबसे बड़ा और पेचीदा पेंच होता है। निर्वाचक मंडल में शामिल सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य निकालने का एक अलग तरीका होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर कैसे राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य निकाला जाता है…

विधायकों के वोट मूल्य निकालने का तरीका

विधायक के वोट का मूल्य निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या में कुल विधायक का भाग दिया जाता है और उस संख्या में 1,000 का भाग दिया जाता है। इसके बाद जो संख्या आती है, वो उस राज्य के विधायक का वोट मूल्य होता है।

सांसदों के वोट मूल्य निकालने का तरीका

सांसद के वोट का मूल्य सभी राज्यों के विधायकों के वोटों के कुल मूल्य में संसद सदस्यों का भाग दिया जाता है। इसके बाद जो संख्या आएगी, वो सांसद के वोट का मूल्य होगा। यह मूल्य हर बार बदलता रहता है और यह वर्तमान संख्या के आधार पर तय होता है।

Presidential election of India पहली पसंद वाले उम्मीदवार की होती है जीत

सांसदों और विधायकों के वोट मूल्य निकालने के बाद सभी सांसद और विधायक वोट देते हैं। इसके बाद विधायक और सांसद की संख्या के स्थान पर उनके वोट मूल्य गिने जाते हैं। इन वोट मूल्य में सबसे पहली पसंद (पहले कोटा) पाने वाले उम्मीदवार को ही विजयी घोषित किया जाता है।

Presidential election of India : उम्मीदवारों की हुई घोषणा

भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान के बाद से ही चुनाव की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। उम्मीदवारों के नाम की घोषणाओं के दौर में NDA ने द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति के उम्मीदवार होंगे। चूंकि राष्ट्रपति के चुनाव के लिए उपयुक्त निर्वाचक मण्डल में पूरे देश से सदस्य शामिल होते हैं इसलिए क्षेत्रीय दलों का प्रभुत्व काफी बढ़ जाता है। आइए जानते है, क्या कहता है इस बार का चुनावी समीकरण…

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिये उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 प्राप्त करना होता है। राष्ट्रपति के चुनाव में क्षेत्रीय दल महत्वपूर्ण कुंजी हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस,आम आदमी पार्टी (AAP), तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में YSRCP की 4 फीसदी और बीजद की करीब 3 फीसदी हिस्सेदारी है। एनडीए 50 प्रतिशत वोट शेयर से कम से कम 1.2 प्रतिशत अंक दूर है, जो उसके उम्मीदवार को राष्ट्रपति पद जीतने के लिए आवश्यक है।

Presidential election of India : व्हिप जारी नहीं किया जा सकता

विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा अपने सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में व्हिप जारी नहीं किया जा सकता। कई बार यह देखा गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव में विपक्षी दलों के सदस्य भी सत्ता पक्ष द्वारा समर्थित उम्मीदवार को समर्थन करते है, जैसे 2002 में जब तत्कालीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के द्वारा एपीजे अब्दुल कलाम का नाम सामने रखा गया, तो विरोधी दलों ने भी इस पर सहमति जताई और भारी बहुमत से कलाम को देश का राष्ट्रपति चुना गया था।

5 साल का होता है राष्ट्रपति का कार्यकाल

जो भी व्यक्ति इस पद पर आसीन होता है, वह 5 साल के लिए स्थाई होता है। इस बीच भले सत्ता परिवर्तन हो लेकिन राष्ट्रपति नहीं बदलते हैं। देश के प्रथम नागरिक होने के नाते राष्ट्रपति के पास कई विशेषाधिकार होते हैं जैसे क्षमा याचिका स्वीकार करना, तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होना, इसके अलावा उनके कार्यकाल के दौरान उन पर किसी भी तरह का आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जैसे अन्य विशेषाधिकार राष्ट्रपति के पास होते हैं।

Presidential election of India वोट समीकरण


इस बार के चुनाव में 776 सांसद (लोकसभा व राज्यसभा के चुने गए सदस्य) और 4,033 विधायक वोटिंग करेंगे। सांसदों के कुल वोट का मूल्य 5,43,200 है और एक मत का मूल्य 700 है। विधायकों के कुल मतों का मूल्य 5,43,231 है। निर्वाचक मंडल के सदस्यों के वोटों की कुल वेटेज 10,98,882 है, यानि जीत के लिए प्रत्याशी को 5,49,442 हासिल करने होंगे।

Source PBNS

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