Vande Bharat Train चलेगी स्लीपर कोच के साथ

दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता रेल मार्गों पर 1800 करोड़ रुपये से टक्कर रोधी तकनीकी कवच लगाया जा रहा

बंगाल मिरर, विशेष संवाददाता : ( Vande Bharat Train) वंदे भारत एक्सप्रेस स्लीपर कोच सुविधा: देश में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. वंदे भारत देश की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेनों में से एक है। ये सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें अब देश के महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ रही हैं। भारतीय रेल की सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस रेल यात्रियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई है। अभी तक यात्रियों को ऐसी आठ ट्रेनों की सुविधा दी जा रही है, लेकिन जल्द ही यात्रियों को वंदे भारत में स्लीपर कोच की सुविधा भी मिलने लगेगी. क्योंकि वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर वर्जन को 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने के लिए डिजाइन किया जाएगा। जिसके बाद यात्री वंदे भारत के स्लीपर वर्जन ट्रेन में सफर का लुत्फ उठा सकते हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि अब वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर वर्जन को 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने के लिए डिजाइन किया जाएगा, हालांकि एल्युमिनियम निर्मित स्लीपर वर्जन की ये ट्रेनें पटरियों पर 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी. उन्होंने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयर कार को चरणबद्ध तरीके से शताब्दी एक्सप्रेस से बदला जाएगा, जबकि स्लीपर संस्करण राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का विकल्प होगा।

दो चरणों में 400 वंदे भारत ट्रेनें

अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में रेलवे ने 400 वंदे भारत ट्रेनों के लिए विज्ञप्ति जारी की है और इस महीने के अंत तक काम को मंजूरी मिल जाएगी।
वंदे भारत स्लीपर वर्जन ट्रेन बनाने के लिए चार बड़ी देशी-विदेशी कंपनियां आगे आई हैं।
योजना के अनुसार, पहली 200 वंदे भारत ट्रेनों में शताब्दी एक्सप्रेस-शैली की बैठने की व्यवस्था होगी और इसे 180 किमी प्रति घंटे की गति से यात्रा करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।
रेलवे ट्रैक की अपर्याप्त सुरक्षा और संरक्षा को देखते हुए उनकी गति 130 किमी प्रति घंटे तक सीमित रहेगी। ये ट्रेनें स्टील की बनेंगी.

जानिए किस स्पीड से चलेगी ट्रेन


दूसरे चरण में 200 वंदे भारत ट्रेनें स्लीपर होंगी और एल्युमीनियम से बनेंगी। यह अधिकतम 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। एक अधिकारी ने बताया कि इसके लिए दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता रेलवे की पटरियों की मरम्मत की जा रही है, सिग्नल सिस्टम, पुलों को ठीक किया जा रहा है और बाड़ लगाने का काम चल रहा है. जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा दोनों रेल मार्गों पर 1800 करोड़ रुपये की लागत से टक्कर रोधी तकनीकी कवच लगाया जा रहा है। जिससे हादसे कम होंगे। अगले दो वर्षों में तमिलनाडु के चेन्नई में आईसीएफ, महाराष्ट्र के लातूर रेल कारखाने और हरियाणा के सोनीपत में 400 ट्रेनों का उत्पादन किया जाएगा।

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