चैंबर सचिव ने पीएम को लिखा पत्र, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार रोकने की मांग, प्रतिबंध लगाया जाए
बंगाल मिरर, आसनसोल 22 दिसंबर 2025: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचार और भारतीय दूतावासों पर हमलों को लेकर देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बीच, असांसोल चैंबर ऑफ कॉमर्स के मानद सचिव शंभु नाथ झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुले पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पत्र में श्री झा ने लिखा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और सोशल मीडिया पर बांग्लादेशियों द्वारा भारत के खिलाफ की जा रही टिप्पणियां सहनशक्ति की सीमा पार कर चुकी हैं।














उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ज्वलंत समस्या की ओर आकर्षित करते हुए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:1. भारत से बांग्लादेश जाने वाली सभी वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।2. बांग्लादेशी नागरिकों को भारत आने के लिए वीजा पर रोक लगाई जाए।3. भारत में मौजूद बांग्लादेशी नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने का आदेश दिया जाए (सरकारी अतिथियों को छोड़कर)।4. हाल के घटनाक्रमों के कारण लौट चुके बांग्लादेशियों का पुनः प्रवेश रोका जाए।5. बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।6. सीमा पर अवैध प्रवेश कराने वाले बीएसएफ अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल जैसी कार्रवाई हो।7. भारत द्वारा बांग्लादेश को दी गई भूमि तुरंत वापस ली जाए।8. नदी जल बंटवारे के सभी समझौतों को रद्द किया जाए।9. थर्मल पावर और रेलवे प्रोजेक्ट्स में भारत का सहयोग पूरी तरह रोक दिया जाए।
श्री झा ने पत्र में कहा कि भारतीय जनमानस बांग्लादेश के इन कारनामों से मर्माहत और आक्रोशित है, इसलिए उपरोक्त बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई की जाए।यह पत्र ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हाल की हिंसा में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उनका शव जला दिया गया। इसके अलावा, भारतीय सहायक उच्चायोग पर हमले और एंटी-इंडिया प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। भारत सरकार ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए बांग्लादेशी अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।व्यापारिक संगठनों और नागरिकों से ऐसी मांगें बढ़ रही हैं, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दबाव डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।


