SAIL ISP मार्च तक 611 ठेका श्रमिकों की छंटनी का निर्देश ! पार्षदों ने दी जोरदार आंदोलन की चेतावनी
बंगाल मिरर, एस सिंह , बर्नपुर: SAIL के IISCO स्टील प्लांट में ठेका श्रमिकों में कटौती का आदेश, 31 मार्च 2026 तक 20% कमी का लक्ष्यबर्नपुर स्थित IISCO स्टील प्लांट में ठेका श्रमिकों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के निदेशक (कार्मिक) के. के. सिंह द्वारा जारी पत्र में 31 मार्च 2026 तक ठेका कार्यबल में 20% की कमी लाने का निर्देश दिया गया है।यह पत्र IISCO स्टील प्लांट के डायरेक्टर-इन-चार्ज सुरजीत मिश्रा को भेजा गया है।














इसमें बताया गया है कि इससे पहले 18 जून 2025, 1 सितंबर 2025 और 6 दिसंबर 2025 को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। साथ ही 22 दिसंबर 2025 को कार्यबल के आकलन की प्रक्रिया और मासिक लक्ष्य भी साझा किए गए थे।हाल ही में इस्पात मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है कि SAIL स्तर पर कुल ठेका श्रमिकों में कम से कम 20% की कमी सुनिश्चित की जाए। यह निर्देश सिर्फ इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य यूनिट्स पर भी लागू होगा।
जारी आंकड़ों के अनुसार:ISP (IISCO स्टील प्लांट) में 1 अप्रैल 2025 को 5,960 ठेका श्रमिक थे, जो 1 फरवरी 2026 तक घटकर 5,379 हो गए हैं। अब इसे घटाकर 4,768 करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी 611 श्रमिकों की और कमी करनी होगी।GD+SGW यूनिट में 541 से घटाकर 432 करने का लक्ष्य तय किया गया है, यानी 103 श्रमिकों की कटौती होगी।पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संबंधित इकाइयां (प्रोजेक्ट्स को छोड़कर) इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विस्तृत योजना तैयार करें और 31 मार्च 2026 तक इसे लागू करें।इस फैसले से ठेका श्रमिकों के बीच चिंता बढ़ सकती है, वहीं प्रबंधन के लिए यह एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी माना जा रहा है।
इस्को में ठेका श्रमिकों की छंटनी पर अशोक रुद्र के नेतृत्व में बर्नपुर अंचल के 12 पार्षदों की चेतावनी, आंदोलन की दी चेतावनी

बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट में ठेका श्रमिकों की प्रस्तावित 20% कटौती के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का विरोध तेज हो गया है। 12 पार्षदों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को चेतावनी दी है।पार्षदों ने कहा, “हम 12 पार्षद शपथ लेते हैं कि यदि इस्को प्रबंधन ठेका श्रमिकों की जबरन छंटनी की प्रक्रिया को किसी भी रूप में आगे बढ़ाता है, तो हम अभूतपूर्व आंदोलन के लिए एकजुट होकर तैयार हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। पार्षदों ने यह भी कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रबंधन और प्रशासन इस विरोध के बीच क्या रुख अपनाते हैं।

