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क्या इंसानों को भी हो सकता है बर्ड फ्लू? जानें बचाव, इलाज और लक्षण

बंगाल मिरर, विशेष संवाददाता :  कोरोना महामारी के बीच देशभर में बर्ड फ्लू नाम की बीमारी एक बार फिर से चर्चा में है। तो चलिए विस्तार से समझते हैं कि यह बीमारी क्या है? इससे बचाव के उपाय क्या हैं? और क्या यह बीमारी इंसानों में हो सकती है? दरअसल, बर्ड फ्लू के नाम की यह बीमारी, एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस H5N1 की वजह से होती है। यही कारण है कि बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस भी कहते हैं। यह वायरल वायरस वैसे तो पक्षियों को अपना शिकार बनाता है लेकिन इंसान भी इससे संक्रमित हो सकते हैं। इस वायरस के बहुत से स्ट्रेन हैं। कुछ माइल्ड होते हैं जबकि कुछ बहुत अधिक संक्रामक होते हैं और जिससे बहुत बड़े पैमाने पर पक्षियों के मरने का खतरा पैदा हो जाता है। इन्फ्लूएंजा के 11 वायरस हैं जो इंसानों को संक्रमित करते हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ पांच ऐसे हैं जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। ये हैं- H5N1, H7N3, H7N7, H7N9 और H9N2। डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट के अनुसार, इंसानों में बर्ड फ्लू के 800 से अधिक केस पाए गए हैं।

बर्ड फ्लू

बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी, सांस फूलना, मांसपेशियों में दर्द होना, सिर दर्द, ठंड के साथ बुखार आना आदि लक्षण नजर आते हैं। इसके लक्षण सामने आने में करीब 2 से आठ दिन का समय लग जाता है। पीएसआरआई के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जी.सी खिलनानी कहते हैं कि इन्फ्लूएंजा वायरस जिसको वायरल इन्फेक्शन या फ्लू कहते हैं, इसके लक्षण बिलकुल कोरोना वायरस वाले ही होते हैं जैसे नाक बहना, गले में खराश होना, छाती में तनाव होना, शरीर में दर्द होना, और जब यह ज्यादा हो जाता है तब ये निमोनिया का भी रूप ले लेता है। लेकिन इसकी मोर्टेलिटी कोरोना वायरस से काफी कम होती है।

इसके ट्रांसमिशन को लेकर डॉ. खिलनानी कहते हैं कि ये कोरोना की तरह ही फैलता है, मतलब ड्रॉपलेट से भी और एरोसॉल से भी। हालांकि, किसी वस्तु को छूने से ये फैलता है या नहीं इसके बारे में अभी साफ नहीं कहा जा सकता।

क्या हैं बचाव के उपाय?

बर्ड फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो किसी पोल्‍ट्री फार्म में काम करते हैं। इससे बचने के लिए पोल्‍ट्री फार्म में काम करने वालों को मुंह पर मास्‍क और हाथों में दस्‍तानों का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा हाथों को हमेशा साफ रखने के लिए साबुन या फिर सैनिटाइजर का उपयोग करना चाहिए। अगर आप पक्षियों के संपर्क में आते हैं तो कोशिश करें कि एक बार अच्‍छे से नहा लें और पोल्‍ट्री फार्म में इस्‍तेमाल किए गए कपड़ों को अच्‍छे से साफ कर लें। डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी के कमिश्नर डॉ. प्रवीण मलिक बताते हैं कि किसी भी मरे हुए पक्षी को अच्छे से डिस्पोज किया जाना चाहिए। जो लोग पक्षियों के संपर्क में आते हैं वह इन बातों का ख्याल रखें कि मीट को डिसइंफेक्ट करके ही डिस्पोज करें।

मांस और अंडे का सेवन करें या न करें?

जी हां, मांस उत्पादों और अंडों को सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है, बशर्ते वे ठीक से तैयार हों क्योंकि मांस के पूरी तरह से पकने के बाद इन्फ्लूएंजा वायरस पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाता है। इसके साथ, ऐसी जगह से कच्चे या अधूरे मांस और अंडे न खरीदें जहां इस वायरस के होने का खतरा हो और जो जानवर बीमार हैं या अप्रत्याशित रूप से मर चुके हैं, उन्हें न खाएं।

ह बीमारी कितनी खतरनाक है?

बता दें, बर्ड फ्लू से होने वाली मृत्यु दर करीब 60 फीसदी है। आंकड़ों की मानें तो 2006 से 2018 के बीच भारत में करीब 225 जगहों पर इसका संक्रमण फैला। इसके संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए 83.49 लाख पक्षियों को मारना पड़ा। एनिमल हसबेंडरी की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2021 तक भारत के 14 राज्यों में इसकी पुष्टि की गयी थी। 14 में से 4 राज्य, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और केरल में सबसे अधिक केस पाए गए थे, इनके अलावा देश के दूसरे राज्यों को भी अलर्ट जारी किया गया था। इन सबसे इतर इससे बचने के लिए जरूरी है कि हम सतर्क रहें, सावधान रहें और सुरक्षित रहें।

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