दामागोड़िया ओसीपी हादसे के बाद ‘खुकू’ नाम चर्चा में, कोयला सिंडिकेट को लेकर कई सवाल
बंगाल मिरर, एस सिंह, आसनसोल: बराकर के दामागोड़िया ओसीपी क्षेत्र में हुए हालिया हादसे के बाद एक नाम तेजी से चर्चा में आ गया है—खुकू। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि खुकू के नेतृत्व में इलाके में एक कोयला सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय है, जो अवैध कोयला कारोबार से जुड़ा हुआ बताया जाता है।सूत्रों के अनुसार, यह सिंडिकेट केवल दामागोड़िया एसीपी तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड से कोयला लदी गाड़ियों के अवैध परिचालन में भी लंबे समय से शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।














हादसे के बाद भी यह चर्चा तेज है कि कथित तौर पर सिंडिकेट का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल देखने को मिली। आरोप है कि एक तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित रूप से खुकू का नाम और एक पुलिस अधिकारी का नाम भी लिया गया था। हालांकि, कुछ ही समय बाद वह पोस्ट डिलीट कर दी गई, जिससे मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुकू आखिर है कौन?किसके संरक्षण में कथित कोयला सिंडिकेट चल रहा है? झारखंड से कोयला ढुलाई में किन लोगों की भूमिका है?और हादसे के बाद भी कारोबार जारी रहने के दावे कितने सही हैं?फिलहाल, इन सभी आरोपों और दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन या पुलिस की ओर से खुकू या किसी सिंडिकेट को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन हादसे के बाद जिस तरह से नाम सामने आ रहे हैं और सोशल मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं, उससे यह मामला अब सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अवैध कोयला कारोबार और कथित संरक्षण की ओर भी इशारा कर रहा है।अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या कोयला सिंडिकेट के कथित नेटवर्क पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
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