Suvendu Adhikari ने राज्यपाल को लिखा पत्र, माइनॉरिटी वोकेशनल डेवलपमेंट बोर्ड में अन्य अल्पसंख्यक समुदाय वंचित क्यों ?
बंगाल मिरर, कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने उद्योग की जरूरतों का आकलन कर अल्पसंख्यक युवाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग देने के लिए माइनॉरिटी वोकेशनल डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया है। जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया। भाजपा नेता एवं राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इसमें मुस्लिमों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।













सुवेंदु ने एक्स ( पूर्व में ट्विटर ) पर पोस्ट किया है कि अल्पसंख्यक युवाओं द्वारा किए जाने वाले प्रासंगिक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सिफारिश करने के लिए अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक “माइनॉरिटी वोकेशनल डेवलपमेंट बोर्ड” की स्थापना की है। अजीब बात है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केवल उर्दू भाषी मुस्लिमों को इस बोर्ड के सदस्य के रूप में चुना है । वहीं सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को नजरअंदाज कर दिया है। वह लोग भी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। लेकिन उन्हें इसमें कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2 (सी) के तहत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी (पारसी) को “अल्पसंख्यकसमुदाय” के रूप में अधिसूचित किया गया है। उन्होंने राज्यपाल को एक पत्र लिखा है। माइनॉरिटी वोकेशनल डेवलपमेंट बोर्ड का गठन करते समय पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी (पारसी) समुदायों के सदस्यों को जानबूझकर प्रतिनिधित्व से वंचित करने का आरोप लगाया है।
- DAV Public School 10 वीं में शानदार प्रदर्शन, टॉपर तनिष्ठा सरकार
- Mamata Banerjee का चौथी बार सीएम बनना तय, रिजल्ट के बाद भाजपा नेता भागेंगे : दासू
- Jamuria Super फैक्ट्री में हादसा श्रमिक की मौत, हंगामा
- দুর্গাপুরে জোরদার প্রচার তিনি প্রার্থীকে নিয়ে আড়াই কিলোমিটার রোডশো মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের
- Agnimitra Pal पर ‘झूठी सूची’ जारी करने का आरोप

