Asansol आनंदम रेजिडेंसी में सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ 2 से 12 जून तक
बंगाल मिरर, आसनसोल। आसनसोल के पंचगछिया स्थित आनंदम रेजिडेंसी में 2 जून से 12 जून तक सवा लाख सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन आनंद वाहिनी संस्था की ओर से किया जा रहा है। इसकी जानकारी संस्था के प्रमुख शंभूनाथ झा ने एक होटल के सभागार में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में दी। इस अवसर पर आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय महामंत्री निभा जी भी मौजूद थीं।शंभूनाथ झा ने बताया कि आनंद वाहिनी, पूरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी से जुड़ी संस्था है। शंकराचार्य जी कई बार आसनसोल आ चुके हैं और यहां उनका मठ भी स्थित है।













उन्होंने कहा कि धर्म के प्रचार-प्रसार और अधिक से अधिक लोगों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने शहरवासियों से इस अनुष्ठान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।उन्होंने बताया कि 2 जून से 12 जून तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार हनुमान चालीसा का पाठ, भजन-कीर्तन और महायज्ञ का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे की भी व्यवस्था की गई है।आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय महामंत्री निभा जी ने कहा कि यह आयोजन शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी के आश्रम के तत्वावधान में हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कलयुग में सनातन धर्म के मूल्यों को बनाए रखने और लोगों को धर्म से जोड़ने की आवश्यकता है। हनुमान जी को कलयुग का देवता माना जाता है और उनके पूजन-पाठ से श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्राप्त होता है।उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान के लिए मिथिला, काशी और बंगाल से 51 विद्वान पुरोहितों और पंडितों को आमंत्रित किया गया है। सभी पंडित पूरे 11 दिनों तक यहीं रहेंगे और उनके रहने तथा भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।निभा जी ने कहा कि यह किसी एक संस्था का नहीं बल्कि पूरे समाज का कार्यक्रम है। समाज के सहयोग के बिना कोई भी धार्मिक आयोजन सफल नहीं हो सकता। यहां सभी श्रद्धालुओं के लिए समान व्यवस्था की गई है और किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा गया है।उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि आज के समय में सभी को ईश्वर के आशीर्वाद की आवश्यकता है। सनातन धर्म की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार के लिए पूजा-पाठ, भजन और नाम जाप अत्यंत आवश्यक है।


