भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने से तनाव मांगों को लेकर सालानपुर में निजी कारखाने के श्रमिकों का आंदोलन प्रबंधन ने मांगा समय
*बंगाल मिरर, सालानपुर, राजा बंदोपाध्यायः* किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपने अधिकारों की लड़ाई मजदूर खुद लड़ेंगे। इसी मांग को लेकर आंदोलनरत श्रमिकों ने कारखाना परिसर से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को वापस जाने पर मजबूर कर दिया। बुधवार सुबह सालानपुर के देन्दुआ इलाके स्थित शकंबरी ग्रुप के ‘एलोक्वेंट’ कारखाने के सामने इस घटना को लेकर काफी तनाव फैल गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कल्याणेश्वरी फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची।सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा, पीएफ, ईएसआई तथा प्रतिदिन 8 घंटे कार्य की मांग को लेकर एलोक्वेंट कारखाने के श्रमिक काफी दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।














आंदोलन की शुरुआत से ही श्रमिक नेता अमर महतो उनके साथ खड़े हैं। इससे पहले 22 जून को भी इन्हीं मांगों को लेकर श्रमिकों ने कारखाने के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय कारखाना प्रबंधन ने जल्द सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। प्रबंधन के आश्वासन के बाद सुरक्षा, पीएफ और ईएसआई से जुड़ी कुछ समस्याओं का समाधान किया गया, लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी अब तक लागू नहीं की गई है। इसी मुख्य मांग को लेकर बुधवार सुबह एक बार फिर श्रमिक कारखाने के सामने एकत्र होकर अपना विरोध जताने लगे।बुधवार सुबह स्थिति को देखते हुए कारखाने के वरिष्ठ अधिकारी सीधे श्रमिकों से बातचीत करने पहुंचे।
कारखाने के मुख्य द्वार के सामने दोनों पक्षों के बीच शांतिपूर्ण वार्ता चल रही थी। इसी दौरान अचानक सालानपुर क्षेत्र से कुछ भाजपा नेता और कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। उनके पहुंचते ही वहां मौजूद श्रमिकों में असंतोष फैल गया। श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि यह उनकी रोजी-रोटी की लड़ाई है और इसमें किसी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कारखाना प्रबंधन के साथ बातचीत कर सकते हैं।
इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई, जिसके बाद नाराज श्रमिकों ने भाजपा नेताओं को कारखाना परिसर से बाहर जाने को कहा। घटना की सूचना मिलते ही कल्याणेश्वरी फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया।भाजपा नेताओं के जाने के बाद श्रमिकों और कारखाना प्रबंधन के बीच फिर से बातचीत शुरू हुई। बैठक के बाद आंदोलनकारी श्रमिकों ने बताया कि कारखाना प्रबंधन ने 17 जुलाई तक का समय मांगा है।
यदि इस अवधि के भीतर सरकार द्वारा निर्धारित उचित मजदूरी लागू नहीं की जाती, तो वे और व्यापक तथा उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।इस संबंध में श्रमिक नेता अमर महतो ने कहा, “मैं पहले दिन से ही श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ हूं और अंत तक उनके साथ रहूंगा। इस संघर्ष के लिए यदि मेरी जान भी चली जाए, तो मैं हंसते हुए उसे न्योछावर करने को तैयार हूं। इस आंदोलन का कोई राजनीतिक रंग नहीं है और हम इसे राजनीतिक नहीं होने देंगे।
श्रमिकों की लड़ाई श्रमिक ही लड़ेंगे। मेरा एकमात्र उद्देश्य है कि श्रमिकों को उनके सभी वैध अधिकार और सुविधाएं मिलें।”उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल कारखाना प्रबंधन के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया है। 17 जुलाई तक प्रबंधन द्वारा दिए गए समय का इंतजार किया जाएगा। इस घटना को लेकर पूरे कारखाना परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।यदि चाहें, मैं इसे समाचार-पत्र शैली की और अधिक परिष्कृत हिंदी में भी तैयार कर सकता हूँ।


