West Bengal : PDS अनाज के वजन में हेरफेर रोकने के लिए नई तकनीक लाने की तैयारी
खर्च हो सकते हैं 34 करोड़, वित्त विभाग से मंजूरी का इंतजार
बंगाल मिरर, कोलकाता : ( West Bengal News In Hindi ) राशन की दुकानों के खिलाफ ग्राहकों को देनेवाले अनाज के वजन में हेराफेरी की शिकायतें मिलती हैं। खाद्य विभाग लंबे समय से इस शिकायत का सामना कर रहा है। इसलिए इस बार वे नई तकनीक लाने के बारे में सोचने लगे हैं। खाद्य विभाग राशन की दुकानों में ई-पीओएस मशीनों को इलेक्ट्रॉनिक मापने वाले उपकरणों से जोड़ने के लिए एक परियोजना शुरू करना चाहता है। ई-पीओएस मशीन के साथ इलेक्ट्रानिक वेइंग मशीन जुड़ी होने पर खाद्य विभाग सीधे राशन ग्राहकों को मिलने वाले खाद्यान्न का वजन ऑनलाइन जान सकता है। अब चूंकि दोनों मशीनों के बीच कोई लिंक नहीं है, इसलिए ई-पीओएस मशीन में दर्ज किए जा रहे खाद्यान्न का वजन कम भुगतान की गुंजाइश है। लेकिन अगर इस नई तकनीक को जोड़ दिया जाए तो विभाग के अधिकारियों को लगता है कि इस प्रणाली के जरिए वजन में हेरफेर को पूरी तरह से रोका जा सकता है।











हालांकि विभाग के अधिकारी जानते हैं कि राशन वितरण में इस नई तकनीक को जोड़ने से काफी पैसा खर्च होगा. वेइंग मशीन को ई-पीओएस से जोड़ने की प्रक्रिया में करीब 16 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा आई स्कैनर सेक्टर की लागत 18 करोड़ रुपए आंकी गई है। अब ई-पीओएस मशीनों की स्थापना और रखरखाव निजी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है। अगर नई व्यवस्था जोड़ी जाती है तो तकनीक जोड़ने का काम निजी क्षेत्र पर छोड़ देना चाहिए। इसके लिए खाद्य विभाग की ओर से वित्त विभाग से स्वीकृति मांगी गई है।
वित्त विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। अब राशन दुकानों में ई-पॉस मशीन के माध्यम से ग्राहकों को खाद्यान्न जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन की जाती है। ग्राहक का आधार नंबर सत्यापित किया जाता है और राशन कार्ड स्वाइप किया जाता है। इस प्रक्रिया में वजन में हेरफेर को रोकना कभी संभव नहीं होता है। गौरतलब है, केंद्र सरकार देश में इस परियोजना को शुरू करने की मंजूरी पहले ही दे चुकी है। उंगलियों के निशान के अलावा, आंखों को स्कैन करके आधार संख्या सत्यापन की प्रणाली शुरू करने की पहल की गई है। ताकि राशन दुकानों पर लगे तौल में हेराफेरी के तमाम आरोपों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। राज्य में इस नई सेवा को शुरू करने के लिए खाद्य विभाग को अब वित्त विभाग का इंतजार है।

