SAIL ISP IISCO का इतिहास सहेजेगा, मांग रहा जानकारी
1918 में बनी थी इस्को, 2006 में सेल ने किया अधिग्रहण
बंगाल मिरर, एस सिंह, बर्नपुर : देश के सबसे पुराने स्टील प्लांटों में शुमार इस्को ( IISCO) के इतिहास को सेल आईएसपी ( SAIL ISP ) प्रशासन सहेजने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए आईएसपी ने हेरटेज कमेटी बनाई है। इस कमेटी ने शिल्पांचल और इससे जुड़े लोगों से इस पहल में मदद की अपली की है। ताकि इस्को के समृद्ध इतिहास को सहेज सके।














आईएसपी में गठित विरासत समिति इस्को के समृद्ध इतिहास के किसी भी अंश की तलाश कर रही है, जो किसी के पास, कहीं भी उपलब्ध हो।
सीजीएम (इलेक्ट्रिकल) और हेरिटेज कमेटी के प्रमुख दीपक जैन ने कहा, “इसका उद्देश्य पुरानी वस्तुओं, दस्तावेजों और विंटेज युग की तस्वीरों को विरासत मूल्य के साथ इकट्ठा करना और उन्हें प्रदर्शित करना है।” जिन लोगों को ऐसे अवशेषों के बारे में कोई जानकारी है, कुछ सादे दृष्टि से छिपे हुए हैं, उनसे आगे आने और अच्छे कारण के लिए जानकारी साझा करने का अनुरोध किया जाता है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे अवशेषों या उनकी तस्वीरों को प्रदर्शित करते समय उनकी देखभाल की जाए। कोई भी जानकारी साझा करने के लिए कृपया अंकुर भादुड़ी से 9434776365 पर या संजय सिंह से 943477102 पर संपर्क करें।
गौरतलब है कि बर्नपुर में 1918 में इस्को कंपनी बनी थी। 1922 में कंपनी के पहले ब्लास्ट फर्नेस तथा 1926 में दूसरे ब्लास्ट फर्नेस ने उत्पादन शुरू किया था। करीब 80 साल तक इस्को ने बर्नपुर को इस्पात नगरी के रूप में विकसित किया। इसके बाद 2006 में स्टील आथरिटी आफ इंडिया ( सेल ) ने इसका अधिग्रहण किया। इसके बाद यह सेल आईएसपी हो गया। इसका आधुनिकीरण और विस्तारीकरण किया गया। यह वर्तमान में 2.5 मिलियन टन उत्पादन क्षमता का आधुनिक प्लांट है। सेल इसके और विस्तार और आधुनिकीकरण की तैयारी कर रहा है।
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