Reader's Corner

“जमशेदजी टाटा : भारत के औद्योगिक युग के निर्माता”

“एक दिव्य पुरुष का जन्म हुआ, था भारत का वो लाल।
जिसने देखे थे स्वप्न नए, किया उन्हें साकार।

वर्ष अठारह सौ उनतालीस, मार्च की थी वो तारीख,
पारसी कुल में जन्म लिया, इतिहास रचाया अद्वितीय।
भारत जब था परतंत्रता में, हाहाकार था चारों ओर,
उस समय में एक नायक ने, देखा स्वप्न था अटल और जोर।

औद्योगिक क्रांति की राह बनाई, दी भारत को नई पहचान,
जमशेदजी टाटा का सपना, बना भारत का स्वाभिमान।
निज लाभ नहीं, देश हित में, सोचा केवल जनकल्याण,
श्रमिकों के सुख-दुख को समझा, दिया उन्हें सम्मान महान।




बंजर भूमि, घने जंगल थे, जहां सिर्फ था सूनापन,
वहां एक नगर बसाने का, किया उन्होंने दृढ़ संकल्प मन।
लोहे और इस्पात की धरती, सपनों का था जहां निर्माण,
जमशेदपुर नाम पड़ा, बन गया औद्योगिक अभियान।

नदियों, पहाड़ों के बीच बसी, इस नगरी ने ली अंगड़ाई,
टाटा स्टील का कारखाना बना, उन्नति की नई शिखर चढ़ाई।
कर्मयोगियों की इस धरती पर, श्रम का था बड़ा सम्मान,
जमशेदजी की सोच महान, बनी भारत की पहचान।

न केवल इस्पात, न केवल धातु, हर क्षेत्र में छवि बनाई,
शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा, हर कोने में लौ जगाई।
बनाया संस्थान भारतीय विज्ञान, ताकि ज्ञान का दीप जले,
भारत को तकनीकी ऊंचाइयों तक, जमशेदजी टाटा ले चले।



स्वदेशी उद्योग बढ़े, आत्मनिर्भरता हो भारत महान,
इस सपने को साकार करने, दिया अपना सर्वस्व दान।
आज भी टाटा नाम जुड़ा है, हर विश्वास, हर उन्नति से,
जिसे जमशेदजी ने रचा, वो अमर रहेगा सदियों से।

न धन की चाह, न नाम की लालसा, बस भारत की सेवा की थी आशा,
स्वप्न था एक समृद्ध देश का, जहां हर जन हो सुखद आशा।
मजदूरों के हित में कानून बनाए, दिया हर श्रमिक को अधिकार,
उनकी सोच का परिणाम है, आज भारत का औद्योगिक संसार।

चाहे हो इस्पात कारखाने, या शिक्षा का हो अभियान,
हर क्षेत्र में योगदान दिया, उनकी दृष्टि थी महान।
भारत माता का सपूत वो, जिसने की सेवा निष्काम,
हर भारतवासी आज भी करता, उनको शत-शत प्रणाम।

*186वीं जयंती पर श्रद्धांजलि*



आज है वो पावन दिन, जब हम सब मिल करें नमन,
जमशेदजी टाटा को याद कर, गाएं उनकी गाथा अनंत।
देश की मिट्टी को जिसने, सोने सा चमकाया,
श्रमिकों के हित में जिसने, खुद को बलिदान बनाया।

जमशेदपुर वासियों को, और पूरे देशवासियों को,
इस दिवस की बहुत-बहुत बधाई, शुभकामनाओं का सुमन लो।
उनकी सीख, उनका आदर्श, हम सब अपनाएंगे,
भारत को औद्योगिक शक्ति में, और आगे ले जाएंगे।

*”अमर हैं टाटा, अमर रहेगा उनका सपना”*

वो सपना जो उन्होंने देखा, हम सबको पूरा करना है,
भारत को नई ऊंचाइयों तक, अब संग मिलकर चलना है।
हर कर्मयोगी का संकल्प यही, मेहनत से पहचान बनाए,
टाटा की इस जमीं पर, नव भारत का दीप जलाए।”

*”जमशेदजी टाटा को कोटि-कोटि नमन!”*
भारत माता की जय!

कवि: सुशील कुमार सुमन
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी बर्नपुर

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