Camac Street और I-Pac ने डूबोया, जिले के नेता और कार्यकर्ता हमारे साथ : अशोक
बंगाल मिरर, आसनसोल: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस कथित तौर पर दो धड़ों में बंट गई है। एक ओर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस है, तो दूसरी ओर ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस का एक नया गुट सक्रिय हो गया है। इस गुट ने पूरे राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए जिला अध्यक्षों की घोषणा करने के साथ-साथ प्रदेश कमेटी का भी गठन कर दिया है।संगठन विस्तार और जिले में नियुक्तियांऋतुव्रत बनर्जी गुट ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। संगठन में बड़े बदलाव करते हुए पश्चिम बर्द्धमान का जिला अध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती को बनाया गया है। इसके अलावा, प्रदेश कमेटी में वरिष्ठ नेताओं अशोक रुद्र और पूर्व मेयर बिधान उपाध्याय को शामिल किया गया है।













”कैमक स्ट्रीट” और ”आईपैक” पर साधा निशाना
इस नई सक्रियता और गुटबंदी पर वरिष्ठ नेता अशोक रुद्र ने तीखा हमला बोला है। अशोक रुद्र ने दावा किया है कि जिले के बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता उनके संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि आसनसोल के 50 से अधिक पूर्व पार्षद और दुर्गापुर के भी बड़ी संख्या में पूर्व पार्षद उनके साथ जुड़े हैं।अशोक रुद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम लोग ही असली तृणमूल हैं। हम वो तृणमूल नहीं हैं जो कैमक स्ट्रीट या आईपैक द्वारा चलाई जा रही है।” उन्होंने कहा कि उनकी नेत्री आज भी ममता बनर्जी ही हैं और वे उन्हीं के आदर्शों पर कार्य कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

टिकट और पदों की बिक्री के आरोप
पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा करते हुए अशोक रुद्र ने ”आईपैक” और ”कैमक स्ट्रीट” को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने ही तृणमूल कांग्रेस को बर्बाद किया है और इन्हीं की नीतियों के कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। रुद्र ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में पार्षद से लेकर विधायक तक के टिकट बेचे गए, यहां तक कि पार्टी के पदों की भी बोली लगाई गई। उन्होंने कहा कि इसी कारण वह उस व्यवस्था के साथ कभी नहीं जाएंगे।शहीद दिवस की तैयारी में जुटा गुटऋतुव्रत बनर्जी गुट का कहना है कि बड़ी संख्या में जिले के नेता और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ने वाले हैं। फिलहाल, यह गुट आगामी ”शहीद दिवस” के कार्यक्रमों को सफल बनाने की तैयारी में पूरी ताकत से जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में यह गुटबंदी पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या नया मोड़ लाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।


