CM Suvendu Adhikari का बड़ा फैसला: बंगाल में अब सरेआम नहीं होगी गौ-कशी, सरकार की सख्त गाइडलाइंस, नहीं मानने पर जेल और जुर्माना
बंगाल मिरर, कोलकाता:** पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य सरकार ने पशु बलि और विशेष रूप से गौ-वंश की हत्या को लेकर एक बेहद सख्त निर्देशिका (Government Notification) जारी की है। 13 मई को जारी इस नए आदेश के अनुसार, अब राज्य में कहीं भी खुले में गाय या भैंस की (वध)बलि नहीं दी जा सकेगी।














**बिना ‘जॉइंट सर्टिफिकेट’ के नहीं होगा वध**
नए नियमों के मुताबिक, किसी भी गाय, बैल या भैंस की वध करने से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए दो स्तरों पर जांच की जाएगी: 1. संबंधित नगर पालिका के **चेयरमैन** या पंचायत समिति के **अध्यक्ष**। 2. एक **सरकारी पशु चिकित्सक** (Government Veterinary Officer)।इन दोनों अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ मिलने के बाद ही पशु बलि की अनुमति दी जाएगी।
**पशु की उम्र और स्वास्थ्य पर कड़े नियम**
सरकार ने **पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950** का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रमाण पत्र केवल उन्हीं पशुओं के लिए जारी किया जाएगा जो: * प्रजनन या काम करने के योग्य न रहे हों और उनकी आयु **14 वर्ष से अधिक** हो चुकी हो। * या फिर वे किसी लाइलाज बीमारी, चोट या शारीरिक विकृति के कारण स्थाई रूप से अक्षम हो गए हों।
**सिर्फ मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में ही अनुमति**
प्रमाण पत्र मिलने के बावजूद, किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध की अनुमति नहीं होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि बलि केवल **नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त कसाईखानों (Slaughterhouses)** में ही दी जा सकेगी।### **नियम तोड़ने पर होगी जेल और जुर्माना**राज्य सरकार ने इस निर्देशिका का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई व्यक्ति बिना सर्टिफिकेट के या खुले स्थान पर नियमों के विरुद्ध पशु वध करता है, तो उसे: * **6 महीने तक की जेल** हो सकती है। * **1,000 रुपये तक का जुर्माना** देना पड़ सकता है। * अथवा जेल और जुर्माना दोनों की सजा एक साथ दी जा सकती है।मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों को ध्यान में रखते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
