धर्म-अध्यात्म

स्मृतियां बाबा हरदेव सिंह जी की🌸लेकर प्यार आए थे सबको प्यार दे गए 🌸

बंगाल मिरर, दिल्ली 13 मई।संत निरंकारी सत्संग भवन, संत निरंकारी कॉलोनी, दिल्ली में आयोजित सत्संग समारोह में सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की अविस्मरणीय यादों का ज़िक्र करते हुए श्री सुरिंदर सहज जी ने कहा कि बाबा जी ने हमेशा सिर्फ प्यार ही प्यार बांटा।सबको ,प्यार ही प्यार दिया, प्यार ही प्यार फैलाया।उस प्यार को हमने संभाल कर रखा या उन्हें केवल गीतों, व्याख्यानों तक ही सीमित किए रखा,यह हम सभी को देखना है।वह प्यार हमारे व्यवहार से प्रकट हो रहा है या नहीं, यह भी चिंतन करने की आवश्यकता है।इस प्यार का सहारा लेने से हर उलझन, हर परेशानी, हर दुख को पार करते हुए गुरसिख प्यार भरा जीवन जीने में सफल होता है। श्री सहज ने कहा कि समर्पण दिवस पर हमें यह ध्यान देना है कि हम पूरी तरह समर्पण कर पाए हैं या नहीं?

क्या केवल समर्पण कहने भर से समर्पण हो जाएगा या इसे पूरी तरह अपनाना भी होगा। कहीं ऐसी स्थिति तो नहीं कि शिकारी आएगा जाल बिछाएगा,हम नहीं फसेंगे ऐसा कहने वाले पक्षी जैसी हमारी हालत हो।वो पक्षी जाल में फंसकर भी यही कहे जा रहे थे कि शिकारी आएगा जाल डालेगा हम नहीं फसेंगे। अगर ऐसी स्थिति है तो स्वयं के अंदर झांकने और उसे ठीक करने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि हमारा चालाक मन औरों की कमजोरियां देखकर स्वयं का बचाव करता है।उसकी आड़ में अपनी कमजोरी छिपाता है और उसे ठीक करने के बजाय दूसरों की कमजोरी ढूंढता रहता है।सद्गुरु हर बार, हर युग में यही कहते रहे हैं कि अपनी ओर देखो अपनी कमियों को देखो, उन्हें दूर करो।उस समय बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के जो प्रोजेक्ट, जो अभियान था आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का भी वही प्रोजेक्ट है क्योंकि गुरु शरीर नहीं, ज्ञान होता है। हर युग में इसका कार्य भी मानवता के उद्धार वाला ही रहा है।सतगुरु शाश्वत सत्य है ये कहीं आता जाता नहीं है। इसकी शिक्षाएं भी वही सनातन शिक्षाएं रहती हैं।सतगुरु का हर काल, हर समय में लक्ष्य एक ही होता है मानवता का कल्याण।

श्री सहज ने कहा कि हम सभी को बाबा जी के सामने जाने का कभी न कभी अवसर आया होगा और वह क्षण हर किसी के लिए एक कीमती धरोहर के समान है। लाखों ही बाबा जी के दीवाने हैं लेकिन हर शख्स यही समझता है कि शायद सबसे ज्यादा प्रेम बाबा जी मुझको ही करते थे।बाबा जी की बहुत सुंदर सोच थी कि दर्द चाहे किसी का भी हो वह उनका दर्द होता था। उनका उद्देश्य होता था कि उनके पास जो भी आए उसका दुख दूर हो जाए।एक नेचुरल गिविंग का भाव उन्होंने हमेशा रखा ,एक देन देने का भाव। ज्ञान सत्य प्रेम सौगात देने का उनका अंदाज निराला था।उनके साथ व्यतीत किए गए समय के प्यार भरे एहसास की ठंडक आज भी दिलों में वैसे ही तरोताजा है।उस ठंडक,उस खुशी का समय हम बढ़ा पाएं,उसे कुछ पल के एहसास से ,पल पल का एहसास बना पाएं तो जीवन का आनंद बहुत बढ़ जाएगा।उनके वचनों को जितना जितना हम मानते जाते हैं उस खुशी का एहसास उतना ही बढ़ता चला चला जाता है। पूरी दुनिया खुश हो जाए उनका प्रोजेक्ट यही था।सोचें कि क्या हम उनके प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा पा रहे हैं ,उसे स्वयं में और अपने परिवार में लागू कर पा रहे हैं ? इस ओर देखने की आवश्यकता है। जैसे वो जंगल की आग फैल रही थी तो छोटी चिड़िया अपने प्रयास में लगी थी। वह चोंच में पानी भरकर पंखों को गीला करके जंगल की आग पर छिड़क देती थी।तो क्या इससे आग बुझ जाएगी जब यह प्रश्न सामने आया तो उसने यही जवाब दिया कि मेरा प्रयास आग बुझाने वालों की कतार शामिल होना था आग लगाने वालों में नहीं।बाबा जी भी यही चाहते थे कि सब को ठंडक देने वाला प्रयास हो ।आज हम कहीं कोई धनराशि इन्वेस्ट करते हैं तो उसमें लाभ हुआ या नहीं उसका पूरा ध्यान रखते हैं।इसी तरह से हम सांसों की पूंजी का क्या लाभ ले पा रहे हैं,इस तरफ भी ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह पूंजी दिनों दिन खत्म हो रही है। कोई कुछ भी कहे मैं चुप रह पाऊं यह सलीका मुझे भी आ जाए फिर हम बाबा जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने योग्य हो जाएंगे। उनकी सहन करने की जो शक्ति थी ,जो अद्भुत सहनशीलता थी वह हमारे जीवन में भी आ जाए। जब हम डॉक्टर को अपनी तकलीफ पूरी ईमानदारी से बताते हैं और फिर उपचार से पूरी तरह से ठीक हो जाते है। सत्संग में आकर निंदा नफरत से छुटकारा पाना है।यह कार्य सबसे जरूरी है ।आजकल महंगे महंगे वर्कशॉप लग रहे हैं जिसमें इन विकारों से बचने के उपाय सुझाए जाते हैं। सत्संग में यह सब निशुल्क उपलब्ध है । यहां समय निकाल कर आने भर की आवश्यकता है और सद्गुरु की कृपा से हमारी हर कमी हर बुराई सत्संग में आकर गुरु के वचनों पर चलकर दूर होती जाती है।महात्मा कहते हैं कि हम सभी इसी प्रकार गुरु के होकर गुरु की शिक्षाओं पर चलकर स्वयं का कल्याण करें और जगत के कल्याण के सद्गुरु के अभियान के हम सभी अंग बन जाएं।दास,हरजीत निषाद 🌸🙏🌸

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News Editor

Mr. Chandan | Senior News Editor Profile Mr. Chandan is a highly respected and seasoned Senior News Editor who brings over two decades (20+ years) of distinguished experience in the print media industry to the Bengal Mirror team. His extensive expertise is instrumental in upholding our commitment to quality, accuracy, and the #ThinkPositive journalistic standard.

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