त्रिपक्षीय समझौते का पालन नहीं करने का आरोप काम बंद कर सालानपुर में निजी कारखाने के कर्मचारियों का विरोध
*बंगाल मिरर, सालानपुर, राजा बंदोपाध्याय:* राज्य सरकार द्वारा घोषित और त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार नया न्यूनतम वेतन नहीं दिए जाने के आरोप में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के सालानपुर स्थित देंदुआ-कल्याणेश्वरी औद्योगिक क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। शनिवार को सालानपुर की एक निजी इस्पात उत्पादन कंपनी के कारखाने के गेट के सामने कर्मचारियों ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का दावा है कि हाल ही में राज्य सरकार, श्रम विभाग और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए नई वेतन संरचना निर्धारित की गई थी। समझौते के अनुसार श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी 386 रुपये होनी चाहिए।














लेकिन कारखाना प्रबंधन समझौते का पालन नहीं करते हुए अभी भी पहले से निर्धारित 323 रुपये की दर से मजदूरी दे रहा है। बार-बार बकाया और बढ़े हुए वेतन की मांग करने के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।श्रमिक नेता अमर नाथ महतो ने शनिवार को कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के मालिकों का संगठन नहीं चाहता कि श्रमिकों को बढ़ा हुआ वेतन मिले। उनके अनुसार, यदि किसी एक कारखाने में यह नियम लागू हो जाता है, तो क्षेत्र की सभी कंपनियों को नई वेतन संरचना माननी पड़ेगी।
इसी आशंका के कारण मालिक पक्ष समझौते के अनुसार वेतन नहीं दे रहा है।उन्होंने कहा कि जब तक श्रमिकों को उनका उचित वेतन नहीं दिया जाता, तब तक वे कारखाने के गेट के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कारखाना लगातार श्रमिकों का शोषण कर रहा है। श्रमिकों को न्यूनतम सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी बार-बार प्रबंधन से गुहार लगानी पड़ती है।उन्होंने आरोप लगाया कि कारखाना प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा के अभाव में किसी श्रमिक की मौत होने पर 14 लाख रुपये दिए जाएंगे।
उन्होंने सवाल किया, “क्या एक श्रमिक की जिंदगी की कीमत 14 लाख रुपये है?” उन्होंने कहा कि कारखाना मालिक बड़ी-बड़ी बातें करने के अलावा कुछ नहीं करते। श्रमिकों को न्यूनतम सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं कराई जाती।प्रदर्शनकारी श्रमिकों से बातचीत करने के लिए कारखाना प्रबंधन की ओर से एक बार प्रतिनिधि आए, लेकिन बातचीत के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।शनिवार के कर्मचारियों के आंदोलन और लगाए गए आरोपों को लेकर कारखाना प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।


