कुल्टी बोरो कार्यालय में भ्रष्टाचार की जांच की मांग को लेकर कांग्रेस का आसनसोल नगर निगम में ज्ञापन, जवाब में मंत्री अग्निमित्रा पाल का कड़ा संदेश
*बंगाल मिरर, आसनसोल, राजा बंदोपाध्यायः* कुल्टी बोरो कार्यालय में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और नागरिक सेवाओं की बदहाल स्थिति का आरोप लगाते हुए गुरुवार को कुल्टी ब्लॉक कांग्रेस ने आसनसोल नगर निगम में एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कुल्टी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुकांत दास ने किया।ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की कि कुल्टी बोरो कार्यालय में अतीत में हुई सभी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में नियमित सड़क मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था, सफाई, जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने सहित नागरिक सेवाओं को जल्द सामान्य करने की मांग भी की गई।














बाद में पत्रकारों से बातचीत में सुकांत दास ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023-24 में टैक्स विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता हुई थी। उनका दावा है कि ऑडिट में लगभग 80 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी, जबकि वास्तविक भ्रष्टाचार की राशि 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रशासन को इसकी जानकारी देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई और आज तक मामले की पूरी जांच नहीं हुई है।

उन्होंने मिड-डे मील, स्कूल ड्रेस की आपूर्ति, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने तथा नगर निगम क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया। साथ ही आसनसोल नगर निगम क्षेत्र में कई अवैध पार्किंग स्थलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यदि त्योहारों के मौसम से पहले वैध पार्किंग व्यवस्था शुरू नहीं की गई, तो आम लोगों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।दूसरी ओर, कांग्रेस के इन आरोपों पर राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो शिकायत कीजिए, जांच होगी। यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।हालांकि, उन्होंने आंदोलन के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने की भी कड़ी चेतावनी दी। मंत्री ने कहा, “आंदोलन कीजिए, विरोध कीजिए, हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ की गई, तो उसका हर्जाना संबंधित लोगों से ही वसूला जाएगा। साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कानून पहले से लागू है।”

