Kolkata – Varanasi Expressway : अब वाराणसी से कोलकाता का सफर होगा महज 6-7 घंटे में
बिहार में 35% कार्य पूरा, परियोजना से बंगाल में तेज होगी विकास की रफ्तार
बंगाल मिरर, विशेष संवाददाता: (Kolkata – Varanasi Expressway) वाराणसी से कोलकाता के बीच यात्रा को क्रांतिकारी रूप से बदलने वाली बहुप्रतीक्षित वाराणसी-रांची-कोलकाता सिक्स-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना पर अब काम ने और अधिक तेजी पकड़ ली है। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के पूरा हो जाने के बाद वाराणसी से कोलकाता का सफर जो पहले 10 से 12 घंटे का होता था, वह घटकर मात्र 6 से 7 घंटे का रह जाएगा।
विशेष तौर पर, पश्चिम बंगाल और कोलकाता के संदर्भ में इस परियोजना को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन या नई राजनीतिक गतिशीलता के बाद से राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) को लेकर कार्य की गति में और तेजी आएगी, जिससे इस अति-महत्वपूर्ण गलियारे (Corridor) के तय समय पर पूरा होने की संभावना काफी मजबूत हो गई है।











बंगाल और कोलकाता के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?
* मेट्रो शहरों से सीधा जुड़ाव: इस एक्सप्रेसवे के जरिए पश्चिम बंगाल सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश और झारखंड के प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों से जुड़ जाएगा। कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों से वाराणसी और औद्योगिक बेल्ट तक की कनेक्टिविटी बेहद सुगम हो जाएगी।
* व्यापार और आर्थिक गलियारा (Economic Corridor): वाराणसी-कोलकाता रूट हमेशा से व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। इस सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे के बन जाने से कोलकाता बंदरगाह और बंगाल के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भारी वाहनों की आवाजाही तेज होगी, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को नए पंख मिलेंगे।


बिहार में प्रगति और पैकेज की स्थिति
बिहार में पैकेज: इस पूरी परियोजना के तहत बिहार राज्य में कुल 6 पैकेज आते हैं।
भौतिक प्रगति: वर्तमान में पैकेज-7 (गया जिला) और अन्य हिस्सों में लगभग 30% से 35% तक काम पूरा हो चुका है।
लक्ष्य: बिहार में इस परियोजना को पूरा करने की समय-सीमा दिसंबर 2027 से मार्च 2028 के बीच तय की गई है।
* समयबद्ध कार्य और प्रशासनिक सहयोग: बंगाल में विकास कार्यों को लेकर नई आस बंधने से भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक स्वीकृतियों जैसी प्रक्रियाएं और तेजी से पूरी हो रही हैं, जिससे कोलकाता और बंगाल तक पहुँचने वाला यह स्ट्रेच समय पर पूरा होता नजर आ रहा है।
परियोजना की अन्य मुख्य विशेषताएँ और सुरक्षा प्रबंध
* एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे और इंटरचेंजेस: यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगा, जहाँ प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के क्रॉसिंग पॉइंट्स पर इंटरचेंजेस बनाए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से एंट्री और एग्जिट ली जा सके।
* पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा: बिहार से गुजरने वाले हिस्से में कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पास लगभग 5 किलोमीटर लंबी टनल (सुरंग) और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलीफेंट अंडरपास व ओवरपास का विशेष प्रावधान किया गया है ताकि प्रकृति को नुकसान न पहुँचे।
* आधुनिक ट्रैफिक निगरानी (ATMS) और ट्रॉमा सेंटर:
* एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और यातायात मॉनिटरिंग के लिए हर 1 किलोमीटर की दूरी पर हाई-डिफ़िनिशन कैमरे लगाए जाएंगे, जिनका नियंत्रण टोल प्लाजा पर बने सेंटर से 24/7 होगा।
* किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना से निपटने के लिए हर 30 किलोमीटर पर बनने वाली वे-साइड एमेनिटीज में ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सके।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल दो सांस्कृतिक राजधानियों (वाराणसी और कोलकाता) के बीच की दूरियां सिमटेंगी, बल्कि पूरे पूर्वी भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल) में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।

