बिना प्रशिक्षण के अन्नपूर्णा योजना का काम करने का निर्देश, बीडीओ कार्यालय में प्रदर्शन करने पहुंचे सालानपुर के आईसीडीएस कर्मी
*बंगाल मिरर, आसनसोल, राजा बंदोपाध्यायः* छोटे बच्चों की पढ़ाई और देखभाल की जिम्मेदारी निभाने वाले आईसीडीएस (आंगनवाड़ी) कर्मियों ने अब उन्हें ‘अन्नपूर्णा योजना’ के फॉर्म सुधारने का काम सौंपे जाने पर तीव्र नाराजगी जताई है। पश्चिम बर्दवान जिले के सालानपुर ब्लॉक के आईसीडीएस कर्मियों का आरोप है कि बिना किसी प्रशिक्षण के उन्हें इस जटिल कार्य में लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को बीडीओ कार्यालय बुलाने के बाद भी घंटों इंतजार कराने के बावजूद न तो बीडीओ और न ही सीडीपीओ उनसे मिलने पहुंचे, जिससे कर्मियों का आक्रोश और बढ़ गया।आईसीडीएस कर्मियों का कहना है कि उनका मुख्य कार्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण संबंधी देखभाल करना है।














लेकिन वर्तमान निर्देश के अनुसार, ब्लॉक की जिन महिलाओं ने अन्नपूर्णा योजना के लिए आवेदन किया था और जिनके फॉर्म किसी कारणवश निरस्त हो गए हैं, उनके घर-घर जाकर फॉर्म की त्रुटियों की जांच कर उन्हें सुधारने का निर्देश दिया गया है।कर्मियों का स्पष्ट कहना है कि जिन आवेदनों को निरस्त किया गया है, उन महिलाओं के पते उन्हें नहीं बताए गए हैं। उन्हें केवल फोन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। एक कर्मी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि रूपनारायणपुर या सालानपुर की कोई कार्यकर्ता फोन करने पर यह जानती है कि संबंधित महिला का घर देंदुआ या किसी दूरस्थ गांव में है, तो उचित यात्रा भत्ता और व्यवस्था के बिना इतनी दूर जाकर काम करना उनके लिए संभव नहीं है।
उनका यह भी कहना है कि यह पूरी तरह नया और तकनीकी कार्य है, जिसकी जिम्मेदारी देने से पहले किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया गया।नाराज कर्मियों का आरोप है कि अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर चर्चा करने के लिए सीडीपीओ कार्यालय से संदेश भेजकर उन्हें बीडीओ कार्यालय में एक बैठक के लिए बुलाया गया था। निर्धारित समय पर सभी आईसीडीएस कर्मी वहां पहुंचे भी, लेकिन उनका आरोप है कि लगभग दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी न तो सीडीपीओ और न ही सालानपुर के बीडीओ वहां पहुंचे।
अंततः उन्होंने तीव्र नाराजगी और रोष व्यक्त करते हुए बिना बैठक किए ही वापस लौटने का निर्णय लिया।आईसीडीएस कर्मियों का साफ कहना है कि पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं, सही जानकारी और आवश्यक प्रशिक्षण के बिना वे अन्नपूर्णा योजना के निरस्त फॉर्मों को सुधारने का कार्य किसी भी स्थिति में नहीं कर सकते। अब देखना यह है कि इस स्थिति में ब्लॉक प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। हालांकि, आईसीडीएस कर्मियों की मांगों और आरोपों को लेकर सालानपुर ब्लॉक प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।


