Asansol Municipal Corporation बोर्ड तत्काल प्रभाव से भंग
बंगाल मिरर, आसनसोल: पश्चिम बंगाल के शहरी विकास और नगर मामलों के विभाग ने 7 जुलाई, 2026 को आसनसोल नगर निगम को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी किया है। सरकार ने यह कठोर कदम निगम की कार्यप्रणाली में पाई गई गंभीर खामियों और संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में विफलता के बाद उठाया है। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल नगर निगम अधिनियम, 2006 की धारा 60 के तहत की गई है।














निगम भंग किए जाने के मुख्य कारण
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, आसनसोल नगर निगम के कामकाज में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके कारण उसे भंग करना अनिवार्य हो गया। इन कारणों में शामिल हैं: * **बैठकों का अभाव:** नगर निगम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही थीं और निर्वाचित प्रतिनिधियों व पार्षदों की भारी अनुपस्थिति देखी गई थी। * **राजस्व का नुकसान:** वाणिज्यिक संस्थानों को नियमों का उल्लंघन करते हुए 20% तक संपत्ति कर में छूट दी गई थी, जिससे निगम को भारी राजस्व का नुकसान हुआ। * **आवास योजना में लापरवाही:** ‘सभी के लिए आवास’ (Housing for All) योजना के तहत स्वीकृत फंड को बिना उचित प्रक्रिया के सरेंडर कर दिया गया था। * **नागरिक सेवाओं में बाधा:** पार्षदों की सक्रिय भागीदारी न होने के कारण पेयजल, स्ट्रीटलाइट, जल निकासी और स्वच्छता जैसी बुनियादी नागरिक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं। * **आपदा तैयारियों में विफलता:** मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं को सुचारू रखने के लिए आवश्यक सक्रियता का अभाव था।
सरकार की कार्रवाई और मेयर का रुख
इस संबंध में शहरी विकास विभाग ने 30 जून, 2026 को एक नोटिस जारी कर निगम से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके जवाब में आसनसोल नगर निगम के मेयर ने 7 जुलाई, 2026 को अपना पक्ष रखा और आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।हालांकि, सरकार ने मेयर द्वारा दिए गए तर्कों को असंतोषजनक पाया। विभाग ने पाया कि: * मई 2026 के बाद से बोर्ड की कोई बैठक नहीं हुई थी। * संपत्ति कर में दी गई छूट कानूनी रूप से उचित नहीं थी। * मेयर द्वारा नागरिक सेवाओं के लिए किए जा रहे कार्यों के दावे किसी ठोस सबूत पर आधारित नहीं थे।सरकार का मानना है कि आसनसोल नगर निगम अपने संवैधानिक और कानूनी दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह से असमर्थ हो गया है, जिसके चलते इसे भंग करने का निर्णय लिया गया है।


