292 वर्षों बाद भी आसनसोल गांव की 9 दुर्गा पूजाएं बरकरार, परंपरा और प्राचीन रीति-रिवाजों की झलक
*बंगाल मिरर, आसनसोल, राजा बंदोपाध्याय:* आसनसोल शहर के भीतर ही आसनसोल गांव स्थित है। इस गांव में एक साथ 9 दुर्गा पूजाएं आयोजित की जाती हैं। इन पूजाओं की पुरानी परंपराएं और रीति-रिवाज इनकी ऐतिहासिक पहचान हैं। प्रतिस्पर्धा और आधुनिकता के इस दौर में भी आसनसोल गांव की 9 दुर्गा पूजाओं की परंपरा 292वें वर्ष में भी बरकरार है।सप्तमी की सुबह एक साथ सभी 9 दुर्गा पूजाओं की नवपत्रिका स्नान की रस्म पूरी की जाती है, जिसे कोला बऊ लाने की परंपरा भी कहा जाता है। चार दिनों की पूजा समाप्त होने के बाद दशमी की शाम को सभी 9 प्रतिमाओं का विसर्जन भी एक साथ शोभायात्रा के साथ किया जाता है।













प्रतिमा विसर्जन से पहले आसनसोल गांव के पास रामसायेर मैदान में आतिशबाजी का प्रदर्शन किया जाता है। आतिशबाजी के बाद रामसायेर तालाब में एक-एक करके 9 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।आसनसोल गांव की इन 9 दुर्गा पूजाओं में दशमी की सुबह सिंदूर खेला की भी एक अलग परंपरा है। इस वर्ष भी यह परंपरा जारी रहेगी। आसनसोल गांव में मां दुर्गा की पूजा में बलि प्रथा लगभग समाप्त हो चुकी है।
9 पूजाओं में से केवल 2 पूजाओं में ही बकरे की बलि देने की परंपरा है। चार दिनों तक पुराने रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के अनुसार पूजा की जाती है।आसनसोल ग्राम दुर्गा पूजा कमेटी और आसनसोल ग्राम श्री श्री नीलकंठेश्वर जीउ देवोत्तर ट्रस्ट के अध्यक्ष सचिन राय ने बताया कि आसनसोल गांव की सभी 9 दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण प्राचीन परंपराओं और पारंपरिक शैली के अनुसार किया जाता है। इस वर्ष भी इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
गांव की सभी 9 पूजाओं की नवपत्रिका को एक साथ स्नान कराने के बाद एसबी गराई रोड स्थित रामसायेर तालाब से मंदिरों तक लाया जाता है।दशमी की सुबह सिंदूर खेला का आयोजन होता है, जिसमें गांव की सभी महिलाएं हिस्सा लेती हैं। दशमी की शाम को परंपरा के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।सचिन राय ने आगे बताया कि इन 9 पूजाओं में नवपत्रिका स्नान सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान वर्षों से एक साथ होते आ रहे हैं।
इन परंपराओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। बलि के बाद पूजा मंडपों में महाभोग ग्रहण करने के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं। सभी लोग अपनी-अपनी तरह से दुर्गापूजा के आनंद में शामिल होते हैं।उन्होंने कहा कि आज भी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा आयोजित होने से आसनसोल गांव के वे लोग बेहद खुश हैं, जो इन पूजाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।
सचिन राय के अनुसार, लगभग 300 वर्ष पहले आसनसोल की स्थापना नकरी राय और रामकृष्ण राय ने की थी। पंचकोट राजा के इन दोनों वीर सेनानियों ने बर्गियों के हमलों से राढ़ बंगाल की रक्षा की थी। वर्तमान में राय परिवार के सदस्यों की कुल संख्या 10 हजार से भी अधिक है। राय परिवार के सदस्य आसनसोल गांव, बुधा गांव सहित विभिन्न स्थानों पर फैले हुए हैं।
पुराने इतिहास के अनुसार, ठीक 293 वर्ष पहले रामकृष्ण राय और नकरी राय ने इस गांव में दुर्गापूजा की शुरुआत की थी। बाद में परिवार का विस्तार हुआ, जिसके कारण पूजाओं की संख्या भी बढ़ती गई। वर्तमान में आसनसोल गांव में कुल 9 दुर्गा पूजाएं आयोजित होती हैं। गांव की इन पूजाओं को बड़ी दुर्गा, मंझली दुर्गा और छोटी दुर्गा सहित विभिन्न नामों से जाना जाता है।

