ASANSOL

Asansol Durga Idol Immersion 2026: आसनसोल गांव में 292 साल पुरानी परंपरा, नौ दुर्गा प्रतिमाओं का एक साथ विसर्जन

आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, कुल्टी और बराकर में मां दुर्गा को दी गई विदाई, सिंदूर खेला के बाद नम आंखों से हुआ विसर्जन


बंगाल मिरर,आसनसोल। (Asansol Durga Idol Immersion 2026 )पश्चिम बंगाल के आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, कुल्टी और बराकर समेत पश्चिम बर्दवान जिले के विभिन्न इलाकों में विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष के दुर्गोत्सव का समापन हो गया। मां दुर्गा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम रहीं, वहीं ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ यानी अगले वर्ष फिर मां का आगमन होगा, के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा।

आसनसोल गांव में 292 वर्षों की परंपरा के तहत विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा



विजयादशमी के अवसर पर विभिन्न पूजा पंडालों में महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला में हिस्सा लिया। महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके बाद गाजे-बाजे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा को विदाई दी गई।


आसनसोल गांव में 292 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा


विशेष समाजसेवी एवं उद्योगपति सचिन राय ने बताया कि आसनसोल गांव में विजयादशमी के अवसर पर 292 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन करते हुए भव्य दुर्गा विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। यहां आयोजित नौ दुर्गा पूजाओं की प्रतिमाओं को एक साथ गाजे-बाजे और धूमधाम के साथ विदाई दी गई। शोभायात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं के उत्साह ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।


इस दौरान महिलाओं ने सिंदूर खेला में हिस्सा लेकर एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस ऐतिहासिक उत्सव में शामिल नजर आए। परंपरा, आस्था और सामूहिक उत्सव का यह संगम आसनसोल गांव की दुर्गा पूजा की खास पहचान बना रहा।


प्रशासन की देखरेख में हुआ प्रतिमा विसर्जन

आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र के विभिन्न नदी घाटों और निर्धारित विसर्जन स्थलों पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा और विसर्जन व्यवस्था के लिए आसनसोल नगर निगम तथा प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए थे।

मां दुर्गा की विदाई के साथ ही दुर्गोत्सव का उल्लास समाप्त हुआ, लेकिन अगले वर्ष फिर मां के आगमन की प्रतीक्षा शुरू हो गई। हर तरफ एक ही भाव सुनाई दिया—‘आबार एशो मां’ यानी मां, अगले वर्ष फिर आना।

शुभ विजयादशमी!

 

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