झाड़ग्राम से गिरफ्तार दो निलंबित एमवीआई, 2 दिन की पुलिस हिरासत
कुल्टी के रामपुर चेकपोस्ट पर कथित वसूली कांड
बंगाल मिरर, कुल्टी/आसनसोल, राजा बंदोपाध्याय: पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर कुल्टी थाना क्षेत्र के रामपुर चेकपोस्ट में कथित तौर पर ट्रकों से अवैध वसूली और रिश्वत लेने के आरोप में दो निलंबित मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) को आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की पुलिस ने शनिवार रात झाड़ग्राम से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम नाजिमुल हक और अनुपम बंद्योपाध्याय बताए गए हैं।














पुलिस सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और झारखंड की अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित रामपुर चेकपोस्ट से गुजरने वाले एक ट्रक को कथित तौर पर रोककर दोनों अधिकारियों ने 22 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। ट्रक चालक की शिकायत और मामले के सार्वजनिक होने के बाद यह घटना सुर्खियों में आई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर परिवहन विभाग ने 23 जुलाई को वेस्ट बंगाल सर्विसेज रूल्स, 1971 के तहत दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंप दी गई। इस संबंध में कुल्टी थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।निलंबन के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे और पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही थी। आखिरकार आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (डीडी) की टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार देर रात झाड़ग्राम में छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
रविवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को आसनसोल अदालत में पेश किया और सात दिन की पुलिस हिरासत की मांग की। हालांकि अदालत ने पुलिस की मांग आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी।मामले पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या यह केवल एक ट्रक से जुड़ा मामला है या इससे पहले भी इस तरह की वसूली की जाती रही है। जांच के दौरान अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।”
इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। सीमा चेकपोस्टों पर लंबे समय से कथित ‘डंडा टैक्स’ और अवैध वसूली की शिकायतें उठती रही हैं। ऐसे में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस कथित वसूली नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था।


