बीबी कॉलेज में मनाई गई प्रेमचंद जयंती
*बंगाल मिरर, आसनसोल:* बनवारीलाल भालोटिया कॉलेज, आसनसोल के हिंदी विभाग की ओर से दिनांक 31/07/2026 को प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया, जिसका विषय ‘यथार्थवाद और प्रेमचंद का साहित्य’ था। सभा में अध्यक्ष के रूप में कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अमिताभ बसु, मुख्य वक्ता के रूप में प्रो• दामोदर मिश्र, पूर्व कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय,, हावड़ा, कॉलेज के ही उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ• मशकूर आलम, हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बिजय कुमार प्रसाद तथा हिंदी विभाग के शिक्षक श्री अमित शर्मा, श्री अजय कुमार सहित अन्य शिक्षकगण एवं स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थी उपस्थित थे।














कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं मंचासीन अतिथियों को पुष्प-गुच्छ व उत्तरीय देकर सम्मानित करने के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अमिताभ बसु जी ने उद्बोधन वक्तव्य में प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर चर्चा की एवं उन्होंने सृजनात्मकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को भी प्रेमचंद के समान सृजनात्मक होना चाहिए, क्योंकि सृजनात्मकता हमें मनुष्यता की ओर अग्रसर करती है।

हमें AI को नकल का टूल बनाने से बचना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी मौलिक चेतना जागृत करनी चाहिए, ताकि उनके व्यक्तिव का विकास हो और समाज के विकास में वे अहम भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो• (डॉ•) दामोदर मिश्र जी ने विषय पर बात रखते हुए कहा कि हिंदी साहित्य में यथार्थ की परंपरा तो पहले से ही थी लेकिन यथार्थवाद की शुरूआत प्रेमचंद के साहित्य से ही होती है। उन्होंने आदर्शवाद और यथार्थवाद के अंतर को स्पष्ट करते हुए प्रेमचंद के आदर्श से यथार्थ की ओर उन्मुखता के पृष्ठभूमि पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पर स्वामी विवेकानन्द और रवींद्रनाथ ठाकुर का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सामाजिक समानता की स्थापना के लिए जाति-धर्म-वर्ग आधारित शोषण के विरुद्ध प्रेमचंद की लेखनी निरंतर चलती रही।
कार्यक्रम के अन्य वक्ता डॉ• मशकूर आलम जी ने अपने वक्तव्य में उर्दू-हिंदी को हिंदुस्तानी जुबां बताया तथा इस हिंदुस्तानी जुबां के प्रखर प्रतिनिधि लेखक के रूप में प्रेमचंद को याद किया और उन्होंने प्रेमचंद को अपने समय का महान अफ़साना निगार बताते हुए कहा कि उनकी महानता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि कई लेखक उनको पढ़-पढ़ कर क्रांतिकारी अफ़साने लिखने लगे और समाज को बदलने में अपना योगदान दिया। हिंदी विभाग के अतिथि शिक्षक श्री अजय कुमार जी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बिजय कुमार प्रसाद जी ने प्रेमचंद के एक उद्धरण को उद्धरित किया, “मैं एक मज़दूर हूँ, जिस दिन कुछ लिख न लूँ, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक़ नहीं।” इस कथन के द्वारा उन्होंने लेखकों की प्रतिबद्धताओं और सामाजिक सरोकारों की ओर संकेत किया।

