नई सरकार को सत्ता दो, लेकिन विपक्ष को भी जीवित रखो” मां कल्याणेश्वरी के दरबार में तृणमूल विधायक मदन मित्रा
“*बंगाल मिरर, कुल्टी, राजा बंदोपाध्याय:* पश्चिम बर्दवान के कुल्टी स्थित मां कल्याणेश्वरी मंदिर में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने पूजा-अर्चना की। कोलकाता से मंदिर पहुंचकर पूजा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, नई सरकार और लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को लेकर अपने विचार रखे।मां कल्याणेश्वरी के प्रति लोगों की गहरी आस्था का उल्लेख करते हुए मदन मित्रा ने कहा कि लोग विश्वास और भक्ति के साथ मां के दरबार में आते हैं। मां से की गई उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।














इसी विश्वास के साथ मैंने राज्य के लोगों की सुख-शांति, समृद्धि और सर्वांगीण कल्याण की कामना करते हुए पूजा की है।राज्य में शांति और सद्भाव का माहौल बनाए रखने की अपील करते हुए मदन मित्रा ने कहा कि आम लोग मारपीट, हिंसा या अशांति नहीं चाहते। बंगाल में शांति और सौहार्द का वातावरण लौटे, यही मेरी प्रार्थना है।नई राज्य सरकार के संदर्भ में मदन मित्रा ने कहा कि युवा शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार राज्य में आई है। वे अच्छा काम करें। उन्हें अच्छी शक्ति मिले। आज मां के दरबार में मैंने यही प्रार्थना की। मैंने मां से कहा कि नई सरकार को सत्ता दो, साथ ही विपक्ष को भी जीवित रखो।
क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह बेहद जरूरी है।उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष के महत्व को भी रेखांकित किया। उनका कहना था कि विपक्ष के बिना लोकतंत्र कभी पूर्ण नहीं हो सकता। सरकार को सही दिशा में चलाने के लिए विपक्ष की सलाह, आलोचना और रचनात्मक भूमिका बेहद जरूरी है। साथ ही सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी चाहिए।राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर मदन मित्रा ने कहा कि इस समय पूरे राज्य में जो अशांति और विवाद का माहौल बना हुआ है, उसमें जल्द बदलाव आएगा, ऐसी उन्हें उम्मीद है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले दिनों में बंगाल में फिर से शांति लौटेगी।
नई सरकार के नेतृत्व में राज्य के लोगों के लिए अच्छा काम होगा, ऐसी उम्मीद भी उन्होंने जताई।मां कल्याणेश्वरी के दरबार में पहुंचकर मदन मित्रा ने पश्चिम बंगाल के लोगों की शांति, समृद्धि और सर्वांगीण मंगल की कामना की।प्रसंगवश, मदन मित्रा इस समय ममता बनर्जी का साथ छोड़कर ऋतव्रत बंद्योपाध्याय के साथ चले गए हैं।


