Rah Veer Scheme : सड़क हादसे के पीड़ितों की मदद करने पर मिलेंगे ₹25,000, और भी पुरस्कार, सम्मान
बंगाल मिरर, आसनसोल: भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की आपात स्थिति में मदद करने वाले आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राह-वीर'( Rah Veer Scheme ) (गुड समैरिटन) योजना के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू रखा है। 21 अप्रैल 2025 से लागू हुई यह संशोधित योजना 16वें वित्त आयोग चक्र (2026–27 से 2030–31) के तहत जारी रहेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘गोल्डन अवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) के भीतर घायलों को चिकित्सीय सहायता दिलाकर दुर्घटना में होने वाली मौतों को कम करना है।














पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान
- नकद इनाम: गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को प्रति घटना ₹25,000 की नकद राशि और प्रशंसा पत्र दिया जाता है।
- प्रति दुर्घटना सीमा: यदि कोई व्यक्ति एक ही दुर्घटना में एक से अधिक पीड़ितों को बचाता है, तो भी पुरस्कार राशि प्रति घटना ₹25,000 तक ही सीमित रहेगी।
- वार्षिक सीमा: एक नागरिक एक वर्ष के भीतर अधिकतम पांच बार इस पुरस्कार का दावा कर सकता है।
- राष्ट्रीय पुरस्कार: प्रतिवर्ष भारत भर में चुने गए 10 सबसे उत्कृष्ट राह-वीरों को ₹1,00,000 का नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र और ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।
पात्रता एवं सत्यापन प्रक्रिया
- सहायता की पात्रता के लिए दुर्घटना ऐसी होनी चाहिए जिसके बाद पीड़ित की बड़ी सर्जरी हुई हो, कम से कम तीन दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा हो, मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई हो, अथवा इलाज के दौरान मृत्यु हो गई हो।
- अस्पताल या पुलिस द्वारा सत्यापन के बाद नागरिक को एक आधिकारिक पावती दी जाती है।
- ज़िलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMOH) और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) की सदस्यता वाली ‘ज़िला मूल्यांकन समिति’ मासिक आधार पर मामलों की समीक्षा कर उन्हें मंज़ूरी देती है।
- स्वीकृत राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) द्वारा ट्रांसफर की जाती है और विवरण को eDAR पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।
कानूनी सुरक्षा और अधिकार
- ‘राह-वीर’ को मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134A और गुड समैरिटन रूल्स, 2020 के तहत पूर्ण कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- बिना स्पष्ट सहमति के किसी भी मददगार को पूछताछ या कानूनी कार्यवाही के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
- अधिकारों का उल्लंघन होने पर नागरिक राज्य सरकार द्वारा गठित शिकायत निवारण समिति के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।





