मैथन में डीवीसी का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट मांगें पूरी नहीं होने पर समन्वय बैठक का ग्रामीणों ने किया बहिष्कार, अनिश्चितता
*बंगाल मिरर, मैथन, राजा बंदोपाध्यायः* जलाशय या डैम के पानी में सोलर पैनल लगाने को लेकर एक बार फिर मैथन क्षेत्र गरमा गया है। मैथन जलाशय में डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) के प्रस्तावित फ्लोटिंग सौर विद्युत परियोजना को लेकर आयोजित समन्वय बैठक बिना किसी समाधान के असफल रही। मुफ्त बिजली, स्थानीय लोगों को स्थायी नौकरी और क्षेत्र के समग्र विकास की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।शुक्रवार को सालानपुर ब्लॉक के कालीपत्थर और रामचंद्रपुर कम्युनिटी हॉल में प्रशासनिक अधिकारियों, डीवीसी अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सालानपुर बीडीओ कार्यालय के प्रतिनिधि, सालानपुर थाने के इंस्पेक्टर इंचार्ज और कल्याणेश्वरी फाड़ी के इंचार्ज उपस्थित थे।














विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मैथन डैम के निर्माण के समय से ही उन्हें स्थायी नौकरी, मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा और पेयजल की सुविधा देने का आश्वासन दिया गया था। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद ये आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं। अब उसी डैम पर नए सिरे से सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। उनकी स्पष्ट मांग है कि स्थानीय गांवों में तत्काल मुफ्त बिजली की आपूर्ति की जाए। योग्यता के आधार पर स्थानीय शिक्षित युवक-युवतियों को स्थायी नौकरी दी जाए। क्षेत्र के विकास के लिए बेहतर अस्पताल, स्कूल और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए।
मांगें पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने तीव्र नाराजगी जताई और अंततः बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। उनका स्पष्ट संदेश है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी हालत में इस परियोजना का काम शुरू नहीं करने दिया जाएगा।डीवीसी मैथन के डीजीएम सुखमय नायक ने कहा कि ग्रामीणों की सभी मांगों को दर्ज कर लिया गया है और विचार के लिए उन्हें उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली या स्थायी नौकरी का मुद्दा सरकारी नीति के अंतर्गत आता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर तत्काल इस संबंध में निर्णय लेना संभव नहीं है।हालांकि, प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कई वादे किए गए। ठेकेदार कंपनी (हरियाणा पावर लिमिटेड) के माध्यम से सभी अकुशल कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा। इसके अलावा आईटीआई, डिप्लोमा या सोलर प्लांट में अनुभव रखने वाले स्थानीय योग्य युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
डैम से सटे गांवों में मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं, ओवरहेड टैंक के जरिए पेयजल की आपूर्ति और लेफ्ट बैंक हाई स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।डीजीएम ने आगे कहा कि यह केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना है। प्रबंधन ने जल्द ही ग्रामीणों के साथ अगले दौर की बातचीत कर इस गतिरोध को दूर करने का आश्वासन दिया है।


