West Bengal

TET अनिवार्य : नौकरी बचाने के लिए एक लाख शिक्षकों को देनी पड़ेगी परीक्षा, शिक्षा मंत्री भी आ सकते हैं जद में !

बंगाल मिरर, विशेष संवाददाता:  सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल में अपनी नौकरी बचाने के लिए लगभग एक लाख शिक्षकों को अनिवार्य टीईटी (TET) परीक्षा में बैठना पड़ सकता है। इस सूची में राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन का नाम भी शामिल होने की आशंका है।

  • मंत्री का पद और योग्यता: दीपक बर्मन, जो पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री बने हैं, मूल रूप से फालाकाटा के देवगांव हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक हैं। हालाँकि बी.एड और स्नातकोत्तर डिग्रीधारी हाई स्कूल के प्रधान शिक्षकों को आमतौर पर इस टीईटी के दायरे में नहीं रखा जाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने प्री-प्राइमरी से अपर प्राइमरी (आठवीं कक्षा तक) के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है।
  • मंत्री की स्वीकारोक्ति: स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख होने के बावजूद, दीपक बर्मन ने टीईटी परीक्षा देने की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा, “मेरे विद्यालय में शिक्षक का पद अपर प्राइमरी सेक्शन में था। इस कारण मुझे परीक्षा देनी पड़ सकती है। विभाग के अधिकारी इस विषय को और बेहतर बता पाएंगे”।
  • विकास भवन में प्रदर्शन: बुधवार को चार शिक्षक संगठनों के एक मंच ने अनिवार्य टीईटी के विरोध में विकास भवन का घेराव किया। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और नारेबाजी के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा, जहाँ मंत्री ने उन्हें अपने परीक्षा में बैठने की संभावना के बारे में बताया।
  • शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया: गणतांत्रिक तृणमूल शिक्षक संगठन के अध्यक्ष अशोक रुद्र ने कहा कि मंत्री ने उनसे कहा, “मेरी नौकरी के लगभग आठ साल बचे हैं, मुझे भी टीईटी देना पड़ सकता है”। रुद्र के अनुसार, मंत्री की इस बात से शिक्षक सांत्वना पाने के बजाय स्तब्ध हैं और उनके बीच खलबली मच गई है।
  • छूट और तकनीकी पेंच: एकप्रधान शिक्षक नेता के अनुसार, मंत्री ने यह बात केवल शिक्षकों को सांत्वना देने के लिए कही होगी। उनका तर्क है कि 2016 से पहले राज्य में अपर प्राइमरी नहीं था और नॉर्मल सेक्शन के शिक्षक 5वीं से 12वीं तक पढ़ाते थे, इसलिए वे इसके दायरे में नहीं आते। इसके अलावा, एक जनप्रतिनिधि के रूप में 5 साल की छुट्टी के बाद जब मंत्री वापस स्कूल ज्वाइन करेंगे, तब उनकी नौकरी के केवल तीन साल बचेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 5 साल से कम सेवा अवधि बचे होने वाले शिक्षकों को परीक्षा से छूट दी है।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चुनावों से पहले बंगाल में कहा था कि सत्ता परिवर्तन होने पर अनिवार्य टीईटी को लेकर कदम उठाए जाएंगे। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी पिछले महीने शिक्षकों को डरे नहीं होने का आश्वासन देते हुए एक सरकारी आदेश जारी होने की बात कही थी, लेकिन ऐसा न होने से शासक दल समर्थक शिक्षक संगठन भी काफी दबाव में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *