Asansol : साढ़े चार साल की तपस्या के बाद विपक्ष की नेता को मिला ‘आश्रय’ !
बंगाल मिरर, आसनसोल: आखिरकार साढ़े चार साल की लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत चर्चाओं और राजनीतिक गलियारों में उठते सवालों के बाद आसनसोल नगर निगम में विपक्ष की नेता चैताली तिवारी को अपना अलग कार्यालय कक्ष मिल ही गया। इसे देखकर कई लोगों को यह कहावत याद आ गई कि “देर आए, दुरुस्त आए”—हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इस मामले में “बहुत देर आए” ज्यादा उपयुक्त रहेगा।फरवरी 2022 में बोर्ड गठन के बाद से ही विपक्ष की नेता के लिए एक कमरे की मांग लगातार उठ रही थी। इस दौरान कई मौसम बदले, कई बैठकों का दौर चला, कई योजनाएं आईं और चली गईं, लेकिन चैंबर का दरवाजा खुलने में साढ़े चार साल लग गए।चैंबर मिलने के बाद चैताली तिवारी ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अब जनता की समस्याएं सुनने और उनके समाधान के लिए काम करना आसान होगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब तक शायद जनता की समस्याएं बिना कमरे के ही किसी तरह सुनी जाती रही होंगी।













उधर मेयर विधान उपाध्याय ने कहा कि निगम सभी जनप्रतिनिधियों को आवश्यक सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बयान के बाद नगर निगम के गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि यदि प्रतिबद्धता की यही गति रही तो आने वाले वर्षों में और भी कई लंबित सुविधाएं जनता को देखने को मिल सकती हैं।राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने वाला यह कदम आखिरकार तब उठाया गया है, जब कार्यकाल का बड़ा हिस्सा गुजर चुका है। कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि अगर कार्यकाल थोड़ा और लंबा होता तो शायद चैंबर के साथ नामपट्टिका और कुर्सी भी समय पर मिल जाती।फिलहाल, नगर निगम में नया चैंबर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि अगला ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसला कब और किसके हिस्से आएगा।


