गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल द्वारा 18वां राग रतन कीर्तन मुकाबला आयोजित
*बंगाल मिरर, आसनसोल:* सिख धर्म के आठवें गुरु श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व को समर्पित एवं स्वर्गवासी मास्टर राजेंद्र सिंह तथा स्वर्गवासी सरदार सुजान सिंह जी की मीठी स्मृति में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी आसनसोल के सहयोग से गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल, पश्चिम बंगाल द्वारा रविवार, 9 अगस्त को गुरुद्वारा साहिब, गोधूलि, जी.टी. रोड, आसनसोल में 18वें राग रतन कीर्तन मुकाबले का आयोजन किया गया।कीर्तन मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता, बैंडल, हालीसहर, दुर्गापुर, रानीगंज, आसनसोल, चिनाकुड़ी, परबेलिया एवं धनबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों से कुल 28 प्रतियोगी पहुंचे।














प्रतियोगियों के सुर, लय, ताल तथा गुरबाणी की शुद्धता की परख के लिए विशेष रूप से शब्द नाद अकादमी के उस्ताद भाई तनवीर सिंह, पटना साहिब से बीबी कुलवंत कौर तथा वितान म्यूजिक अकादमी की प्रिंसिपल तापती मित्रा निर्णायक मंडल के रूप में उपस्थित रहीं।सभी प्रतियोगियों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया। प्रथम वर्ग में कोलकाता के इश्मीत सिंह ने प्रथम, बैंडल के रौनक सिंह ने द्वितीय तथा रानीगंज के रनवीत सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।द्वितीय वर्ग में बैंडल के हरसमरथ सिंह ने प्रथम, धनबाद के तेजवीर सिंह ने द्वितीय तथा चिनाकुड़ी की हरप्रीत कौर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
तृतीय वर्ग में परबेलिया की अंतरजोत कौर एवं दुर्गापुर के हर्षदीप सिंह ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। हालीसहर के जगमोहन सिंह एवं चिनाकुड़ी के रौबी सिंह संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि बैंडल की रवनीत कौर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।कार्यक्रम के मंच का संचालन सरदार जसपाल सिंह, सरदार गुरदीप सिंह आसनसोल, सरदार गुरदीप सिंह रानीगंज, बीबा सिमरन कौर एवं बीबा हरलीन कौर द्वारा किया गया।
विजेताओं के नामों की घोषणा करने के साथ-साथ निर्णायक मंडल के सदस्यों, सभी प्रतियोगियों एवं उनके अभिभावकों तथा गुरुद्वारा प्रबंधन समिति का धन्यवाद सरदार गुरविंदर सिंह द्वारा किया गया।इस अवसर पर गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल, पश्चिम बंगाल एवं आसनसोल गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पदाधिकारी तथा सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत की उपस्थिति रही और पूरे आयोजन में गुरबाणी कीर्तन के प्रति बच्चों एवं युवाओं का उत्साह देखने को मिला।


