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सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा के पांच पोकलेन से अवैध बालू खनन

बंगाल मिरर,रिक्की बाल्मीकि , बाराबनी : बाराबनी थाना अंतर्गत श्यामापुर इलाके में अजय नदी पर स्थित बालू घाट (बलिघाट) को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय रेत कारोबारियों पर सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बालू निकालने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि बालू माफिया प्रशासन के नियमों की परवाह किए बिना नदी के बीचों-बीच भारी मशीनें उतारकर अंधाधुंध खनन कर रहे हैं। इस वजह से न केवल पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और नदी का प्राकृतिक मार्ग प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में पीने के पानी का भी भारी संकट खड़ा हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस बेलगाम खनन के कारण आदिवासी और दास समाज का बरसों पुराना पारंपरिक श्मशान घाट भी पूरी तरह से अस्तित्व के संकट में आ गया है।

भारी मुनाफे के लिए उतारीं 5 पोकलेन मशीनें, दिन-रात जारी है खेलस्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बालू घाट के संचालन के लिए सरकार द्वारा एक निश्चित क्षेत्र और मानचित्र (मैप) निर्धारित किया जाता है, जिसका पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए नदी के बीचों-बीच एक साथ पांच-पांच भारी पोकलेन मशीनें उतार दी गई हैं। इन मशीनों के जरिए दिन-रात लगातार नदी का सीना चीरकर ट्रकों और हाईवा गाड़ियों में बालू लोड करने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।संस्कृति और आस्था पर चोट, श्मशान घाट का वजूद खतरे मेंग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में यह भारी खनन किया जा रहा है, ठीक उसी के पास बिंदुडीह और श्यामापुर गांव के आदिवासी और दास समाज का श्मशान घाट स्थित है।

लंबे समय से इन दोनों समुदायों के लोग इसी श्मशान घाट पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार और विभिन्न धार्मिक व पारंपरिक रीति-रिवाज पूरे करते आ रहे हैं। लेकिन भारी मशीनों के लगातार इस्तेमाल और चौबीसों घंटे चलने वाली खुदाई के कारण अब वहां अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान करना बेहद मुश्किल हो गया है, जिससे दोनों समुदायों की आस्था को गहरी ठेस पहुंच रही है।बड़े आंदोलन की चेतावनी, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजेंगे पत्रस्थानीय निवासियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि पुलिस और संबंधित विभाग ने तुरंत हस्तक्षेप कर इस अवैध खनन को बंद नहीं कराया, तो वे एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, देश के प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति को भी इस मामले की लिखित शिकायत भेजेंगे।अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस व स्थानीय प्रशासन बालू माफियाओं के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करता है। फिलहाल पूरे इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और ग्रामीणों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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