ASANSOL

Asansol जब कमिश्नर को ही उतरना पड़े सड़क पर, तो सफाई विभाग किस काम का ?

बंगाल मिरर, आसनसोल:  ( Asansol News ) आसनसोल शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर इन दिनों एक दिलचस्प तस्वीर सामने आ रही है। नगर निगम में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए निर्मल बंधु, सुपरवाइजर से लेकर सेनेटरी इंस्पेक्टर, सहायक अभियंता और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर तक की पूरी व्यवस्था है। लेकिन तस्वीर कुछ ऐसी है कि अब निगम आयुक्त दिलीप मिश्रा को खुद सड़क पर उतरकर सफाई व्यवस्था की निगरानी करनी पड़ रही है।


शहर में शायद यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि जिस सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी टीम की है, उसकी ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ खुद कमिश्नर ले रहे हैं। सवाल उठना स्वाभाविक है—जब इतने अधिकारी और निगरानी तंत्र मौजूद हैं, तो फिर कमिश्नर को भी मैदान में उतरने की जरूरत क्यों पड़ रही है?


दरअसल, नगर निगम की ओर से शहर में विशेष सफाई और निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान निगम की टीम एक ऐसे स्थान पर पहुंची, जहां बाकायदा डस्टबिन रखा हुआ था। लेकिन डस्टबिन के आसपास और उसके पीछे कचरे का अंबार देखकर लगा कि लोगों ने डस्टबिन को कचरा डालने की जगह नहीं, बल्कि कचरा जमा करने के लिए ‘लैंडमार्क’ मान लिया है।


कमिश्नर दिलीप मिश्रा ने मौके पर लोगों को समझाया कि डस्टबिन मौजूद है तो कचरा उसके अंदर ही डाला जाए। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने से बचने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संबंधित जगह ‘गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट’ बन गई है।

नगर निगम के मुताबिक शहर में 100 से अधिक ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां लोग डस्टबिन होने के बावजूद इधर-उधर कचरा फेंकते हैं। फिलहाल निगम पहले सफाई करा रहा है और लोगों को जागरूक कर रहा है। लेकिन चेतावनी साफ है—अगर इसके बाद भी लोग नहीं सुधरे तो फाइन किया जाएगा।

कमिश्नर ने दुकानदारों के लिए भी नियम स्पष्ट करते हुए कहा कि हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान में डस्टबिन होना चाहिए और गीले तथा सूखे कचरे को अलग-अलग रखना होगा। निगम की ‘निर्मल बंधु’ गाड़ी जब कचरा लेने पहुंचे तो उसे अलग-अलग करके सौंपना होगा।

निगम ने यह भी कहा है कि किसी कमर्शियल इलाके में डस्टबिन की जरूरत हो तो दुकानदार निगम से संपर्क कर सकते हैं, निगम डस्टबिन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

फिलहाल कमिश्नर का सड़क पर उतरना सफाई व्यवस्था को लेकर सख्ती का संदेश जरूर दे रहा है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी शहर में चर्चा का विषय बन रहा है—अगर कमिश्नर को खुद सड़क पर उतरकर डस्टबिन के आसपास की सफाई और निगरानी करनी पड़े, तो फिर इतने बड़े सफाई अमले और अधिकारियों की जिम्मेदारी आखिर कहां से शुरू होती है और कहां खत्म?

शायद अब सफाई व्यवस्था की असली परीक्षा सिर्फ सड़क साफ होने की नहीं, बल्कि यह देखने की भी है कि कमिश्नर के सड़क पर उतरने के बाद व्यवस्था कितनी दूर तक सुधरती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *