ECL में समितियों की ‘बाढ़’ या फिजूलखर्ची का नया खेल? खस्ताहाल वित्तीय स्थिति के बीच नई कमेटी के गठन पर उठे गंभीर सवाल !
बंगाल मिरर, आसनसोल: ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) इन दिनों गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही है। कंपनी घाटे और वित्तीय संकट से जूझ रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन की ‘शाहखर्ची’ कम होने का नाम नहीं ले रही। ताजा मामला खदानों की सुरक्षा, उत्पादन और कार्य स्थितियों के अध्ययन के नाम पर बनाई गई एक और नई कमेटी से जुड़ा है, जिसे लेकर ईसीएल के गलियारों में घमासान मच गया है।














आधिकारिक आदेश (Ref. No. ECL/CMD/C-6-166, दिनांक 27.08.2026) के तहत प्रबंधन ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों को मिलाकर दो-दो ‘सुपर टीमों’ का गठन कर दिया है। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा करेंगी, वाहनों का लुत्फ उठाएंगी और निदेशक (मानव संसाधन) को रिपोर्ट सौंपेंगी। लेकिन असली कहानी इस आदेश के पीछे छिपी हुई है, जिसे लेकर आम कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
कर्मचारियों के बड़े सवाल और गहराता सस्पेंस:
* पहले से मौजूद कमेटियों का क्या? ईसीएल में पहले से ही वेलफेयर कमेटी, सेफ्टी कमेटी, कॉर्पोरेट जेसीसी और कई अन्य कमेटियां सक्रिय हैं। जब हर स्तर पर सेफ्टी और वेलफेयर की देखरेख के लिए समितियां पहले से मौजूद हैं, तो फिर इस नई ‘निरीक्षण मंडली’ को खड़ा करने का क्या औचित्य है?
* कंपनी की तिजोरी पर अतिरिक्त बोझ: जब कंपनी की आर्थिक सेहत पहले से ही वेंटिलेटर पर है, तब नई-नई समितियों के नाम पर वीआईपी दौरे, गाड़ियों का काफिला और दौरों का खर्च बढ़ाना कहां की समझदारी है? क्या यह कंपनी के पैसे की सीधी बर्बादी नहीं है?
* सफेद हाथी साबित हो रही समितियां: कर्मचारियों का साफ तौर पर पूछना है कि जब पुरानी कमेटियों की सिफारिशें ही अक्सर ठंडे बस्ते में धूल फांकती रहती हैं, तो इस नई कमेटी से कौन सा अचानक चमत्कार हो जाएगा?
* आखिर क्या है इसके पीछे का ‘राज’?: श्रमिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या यह नई कमेटी वाकई सुरक्षा और उत्पादन में सुधार के लिए बनी है, या फिर यह सिर्फ यूनियन नेताओं को खुश रखने, उन्हें ‘दौरे’ का पैकेज देने और प्रबंधन द्वारा अपनी कमियों पर पर्दा डालने का कोई अंदरूनी ‘पॉवर गेम’ है?
पहले से मौजूद दर्जनों समितियों के बावजूद एक और नई कमेटी का यह ‘अचानक’ गठन कई सवाल छोड़ता है। अब देखना यह होगा कि कंपनी की डूबती नैया के बीच यह नई समिति उत्पादन बढ़ाती है या फिर ईसीएल के खजाने पर सिर्फ एक और भारी-भरकम बोझ बनकर रह जाती है!
गठित समितियों का विवरण:
समूह 1 (Group 1):
श्री एस. के. पांडे – सीएमसी (HMS)
श्री गौरंगो चटर्जी – सीएमएसआई (CITU)
श्री गुरुदास चक्रवर्ती – सीएमएस (AITUC)
श्री अंगद उपाध्याय – बीएमएस (BMS)
समूह 2 (Group 2):
श्री जी. के. श्रीवास्तव – सीएमएसआई (CITU)
श्री प्रफुल्ल चटर्जी – सीएमसी (HMS)
श्री विनोद कुमार सिंह – बीएमएस (BMS)
श्री जी. एस. ओझा – सीएमएस (AITUC)
क्षेत्रों में भ्रमण के लिए वाहनों की व्यवस्था ईसीएल मुख्यालय के प्रशासन विभाग द्वारा आईआर विभाग के शेड्यूल के अनुसार की जाएगी।


